वित्तीय वर्ष 2026-27 बजट : आईसीएमएआई पूर्वी भारत क्षेत्रीय परिषद के कोषाध्यक्ष ने अबुआ दिशोम बजट को बताया जनविरोधी, राज्य के आय का रोडमैप नदारद

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रांची : झारखंड सरकार के बजट2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आईसीएमएआई पूर्वी भारत क्षेत्रीय परिषद के कोषाध्यक्ष विद्याधर प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुतअबुआ दिशोम बजट 2026-27 जनविरोधी और भ्रमपूर्ण है. यह बजट महज दिखावटी घोषणाओं का संग्रह है, जिसमें राज्य की वास्तविक चुनौतियों जैसे यातायात, रोजगार संकट, शहरी अव्यवस्था, पर्यावरणीय आपदा और महिलाओं-किसानों की उपेक्षा का कोई ठोस समाधान नहीं है.

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में केंद्र के राजस्व बंटवारे और अनुदान में15-20प्रतिशत की गिरावट पर चिंता जताई गई, लेकिन राज्य की अपनी आय बढ़ाने जैसे खनन, रॉयल्टी सुधार, टैक्स नीतियाँ या निवेश बढ़ाने के रोडमैप का अभाव है. युवाओं के लिए बड़ी रोजगार योजनाएँ नदारद हैं.खनिज-समृद्ध झारखंड, जहाँ कोयला, यूरेनियम और लौह अयस्क के40प्रतिशत भंडार हैं, में उद्योग स्थापन, एमएसएमई क्लस्टर या निवेश के लिए कोई पहल नहीं हुई है, जिससे बेरोजगारी दर बढ़ेगा.

विद्याधर प्रसाद ने कहा कि पिछले5वर्षों में काफी वन क्षेत्र सिकुड़ चुका है और जल संकट व प्रदूषण चरम पर है, फिर भी हरित विकास या सतत खनन की कोई योजना नहीं है. लगभग दो करोड़ महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए अधिक बजटीय प्रावधान होना चाहिए. किसानों के लिए भी सिंचाई व एमएसपी गारंटी का अभाव है.

शिक्षा, स्वास्थ्य व कृषि के नाम पर घोषणाएँ हैं, लेकिन नए स्कूल बिना शिक्षकों के, अस्पताल बिना दवाओं के और योजनाएँ बिना फंडिंग के साबित होंगी. यह बजट लगभग चार करोड़ झारखंडवासियों को गुमराह करने का प्रयास है.