शहीद रणधीर वर्मा को दी गई संगीतमय श्रद्धांजलि : धनबाद में सूफी गायक पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने बिखेरी अपनी गायकी का जलवा

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धनबाद: आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की आहुति देनेवाले शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा को धनबाद ने उनके 35वें शहादत दिवस पर याद किया. सूफी गायक पद्मश्री डॉ भारती बंधु की गायकी में शहीद के शौर्य पराक्रम को दर्शाया गया. जनप्रतिनिधियों,प्रशासनिक अधिकारियों एवं शहर के गणमान्य लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया.

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रणधीर वर्मा 35 वर्ष पहले खालिस्तानी आंतकवादियों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे. नई पीढ़ी के लिए यह जानना बेहद जरूरी है रणधीर वर्मा भारतीय पुलिस सेवा के ऐसे पुलिस अधिकारी थे जो खुद ही मोर्चा लेने में भरोसा रखते थे. इसलिए शहादत के इतने सालों बाद भी उनके यश की गाथाएं सबकी जुबान पर है. तीन जनवरी 1991 को धनबाद स्थित बैंक आफ इंडिया की हीरापुर शाखा को लूटने पंजाब से आए दुर्दांत खालिस्तानी आतंकवादियों से अकेले मोर्चा लिया. वे व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता किए बगैर अपने अंगरक्षक के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. आतंकवादियों को ललकारते हुए पहली मंजिल स्थित बैंक की सीढिय़ों पर चढऩे लगे. गोलियां चलीं. घायल रणधीर वर्मा ने रिवाल्वर से ही दो आतंकवादियों को मार गिराया. ....और खुद वीरगति को प्राप्त हुए. उनके इस 35 वें शहादत दिवस पर रणधीर वर्मा चौक स्थित शहीद की आदमकद प्रतिमा पर शहीद की धर्मपत्नी प्रो. रीता वर्मा,सांसद ढुल्लु महतो,विधायक रागिनी सिंह जिप अध्यक्ष शारदा सिंह,डीसी आदित्य रंजन,एसएसपी प्रभात कुमार समेत शहर के गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की.

इस संगीतमय श्रद्धांजलि सभा से पूर्व सशस्त्र पुलिस द्वारा शहीद को सलामी दी गई. इस संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विशेष तौर से प्रसिद्ध सूफी गायक पद्मश्री डॉ. भारती बंधु उपस्थित हुए. जिन्होंने अपनी गायकी से शहीद के शौर्य और पराक्रम की गाथा को दर्शाया. डॉ भारती बंधु की गायकी को "भारती बंधु शैली" कहा जाता है,जो दुनिया में अपनी तरह की इकलौती शैली मानी जाती है. यह उनके पारिवारिक विरासत से विकसित हुई है. इसमें सूफी गायन की तरह गहन भाव,लयबद्ध तानें और समां बांधने की क्षमता होती है.

रणधीर वर्मा को राष्ट्रपति ने मरणोपरांत विशिष्ट वीरता सम्मान से सम्मानित किया था जहां उद्घोषित हुआ कि यह राष्ट्र का सपूत भारतीय पुलिस सेवा में एक अनोखा उदाहरण है,जिसकी कर्तव्यपरायणता और साहस की मिसाल भारतीय पुलिस सेवा के पदाधिकारियों में अब तक नहीं मिली. उन जैसा देहदानी पुलिस विभाग में पहले कोई नहीं हुआ था. इसलिए भारत सरकार ने उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया तथा उनके सम्मान में डाक टिकट तक जारी किया गया. बहरहाल शहीद रणधीर वर्मा आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं.

धनबाद से कुंदन कुमार की रिपोर्ट--