नशा मुक्त योजना बेअसर : चतरा के इस गांव में बच्चे-बड़े सभी नशे की जद में,सूरज ढलते ही शूरू हो जाता नशे का बोलबाला

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चतरा: जिला मुख्यालय से सटे सदर प्रखंड के बेरियो चक गांव की एक ऐसी सच्चाई है, जो किसी को भी झकझोर कर रख देगा. केंद्र और राज्य सरकार जहां नशा मुक्ति के लिए लगातार योजनाएं चला रही हैं, वहीं यह गांव नशे की ऐसी दलदल में फंसा है कि शाम ढलते ही युवा,बच्चे-बच्चियां और बुजुर्ग महिला कोई भी इससे अछूता नहीं रहता है. ग्रामीणों के मुताबिक, जैसे ही सूरज ढलता है गांव की गलियों में नशे का बोलबाला शुरू हो जाता है. घर-घर में नशे का सेवन आम बात हो चुकी है.

कम उम्र के बच्चे भी नशे की चपेट में

हालात इतने गंभीर हैं कि कम उम्र के बच्चे-बच्चियां भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. नशे की लत अब सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि जानलेवा संकट बन चुकी है. गांव में अब तक कई लोगों की मौत भी नशे के कारण हो चुकी है. कभी जहरीली शराब तो कभी अत्यधिक सेवन मौत का कारण बन चुका है. बावजूद इसके न तो अवैध शराब पर लगाम लग पा रही है ना ही नशा कारोबारियों पर ठोस कार्रवाई हो रही.

गांव को नशा मुक्त करने की मांग तेज

लगातार हो रही मौतों और बिगड़ते सामाजिक माहौल से तंग आकर अन्य ग्रामीणों ने खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है. गांव को नशा मुक्त घोषित करने, अवैध शराब की बिक्री पर सख्त रोक लगाने और नशा मुक्ति अभियान को जमीनी स्तर पर लागू करने की मांग जोर शोर से की जा रही है.

चरता से संजय कुमार की रिपोर्ट