मंत्री अशोक चौधरी एवं सायन कुणाल पहुंचे गोपालगंज : थावे दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर बलथरी चेकपोस्ट पर विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की पूजा में हुए शामिल
गोपालगंज : बिहार के मंत्री अशोक चौधरी और बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य सायन कुणाल सोमवार को गोपालगंज पहुंचे. दोनों ने सबसे पहले थावे दुर्गा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और इसके बाद कुचायकोट थाना क्षेत्र अंतर्गत बलथरी चेकपोस्ट पर विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की पूजा-अर्चना में शामिल हुए. पूजा के बाद यह विशाल शिवलिंग अपने अंतिम गंतव्य, पूर्वी चंपारण के केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया जाएगा. यह दृश्य सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन आस्था की ऐतिहासिक झलक है. करीब 210 मीट्रिक टन वजनी, ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह शिवलिंग विश्व का सबसे बड़ा एकल शिवलिंग माना जा रहा है.
इस शिवलिंग की स्थापना पूर्वी चंपारण के केसरिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में होनी है. मंत्री अशोक चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि“यह शिवलिंग सिर्फ पत्थर की आकृति नहीं,बल्कि एक महान संकल्प का प्रतीक है.
स्वर्गीय किशोर कुणाल जी ने सपना देखा था कि ऐसा शिवलिंग बने,जिसके दर्शन और जलाभिषेक से 1008 शिवलिंग के पूजन का पुण्य प्राप्त हो. लंबे समय से ऐसा कोई उदाहरण नहीं था और आज वह सपना साकार हो रहा है.”उन्होंने बताया कि यह शिवलिंग पूरी तरह से ग्रेनाइट पत्थर से बना है और इसका निर्माण महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा कराया जा रहा है. महावीर मंदिर ट्रस्ट की टीम इस पूरे प्रोजेक्ट की लगातार समीक्षा कर रही है ताकि निर्माण और स्थापना पूरी शुद्धता,भव्यता और परंपरा के अनुरूप राजनीतिक और सामाजिक हो. इस पावन अवसर पर बिहार विधान परिषद सदस्य राजीव कुमार सिंह उर्फ गप्पू बाबू और बरौली विधायक मनजीत सिंह भी मौजूद रहे. मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि दोनों जनप्रतिनिधि सनातन धर्म में गहरी आस्था रखते हैं और उनके नेतृत्व में ही गोपालगंज के बलथरी बॉर्डर पर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई.
उत्तर प्रदेश से भी हनुमानगढ़ी से जुड़े संत और श्रद्धालु इस शिवलिंग के स्वागत में गोपालगंज बॉर्डर तक पहुंचे. मंत्री ने कहा कि “हनुमान जी को रुद्र पुत्र माना जाता है, और महादेव स्वयं हनुमान जी के रूप हैं. ऐसे में इस शिवलिंग की स्थापना से बिहार में सनातन परंपरा को नई ऊर्जा और नई शक्ति मिलेगी.”
बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य सायन कुणाल ने जानकारी दी कि “लगभग 10 से 12 तारीख के बीच यह शिवलिंग केसरिया पहुंच जाएगा. 17 तारीख, मार्ग कृष्ण चतुर्दशी के पावन अवसर पर इसकी विधिवत स्थापना की जाएगी.” उन्होंने आगे बताया कि विराट रामायण मंदिर का संपूर्ण निर्माण कार्य वर्ष 2030 तक पूरा कर लिया जाएगा. इसी वर्ष सभी देवी-देवताओं की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होगी और इसके बाद यह मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा. तो गोपालगंज की धरती से शुरू हुई यह शिवभक्ति की विराट यात्रा न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश और विश्व के सनातन श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक अध्याय बनने जा रही है. विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग, विराट रामायण मंदिर और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था—यह सब मिलकर बिहार को एक वैश्विक धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है.
गोपालगंज से नमो नारायण मिश्र की की रिपोर्ट—





