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JHARKHAND NEWS : जल जीवन और आवास योजना में बड़ा घोटाला: अयोग्य ठेकेदारों को 159 करोड़ के टेंडर, 28% गरीब छत को तरसे

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क्या झारखंड के गरीबों के हक पर डाका डाला जा रहा है? क्या केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं यहां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं?

ये सवाल हम नहीं उठा रहे, बल्कि देश की सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्था—सीएजी (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने झारखंड में जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को लेकर बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे किए हैं।

पहली कहानी जुड़ी है 'जल जीवन मिशन' से, जिसके तहत हर घर तक शुद्ध पानी पहुँचाना था। लेकिन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य ठेकेदारों पर मेहरबानी की हदें पार कर दीं।

नियमों के मुताबिक, निविदा यानी टेंडर की क्षमता सिविल इंजीनियरिंग के कामों के आधार पर तय होनी चाहिए थी। लेकिन सीएजी रिपोर्ट बताती है कि एक ऐसे ठेकेदार को काम सौंप दिया गया जिसकी कागजी क्षमता 'शून्य' थी!वित्तीय वर्ष 2021-22 में इस ठेकेदार ने सिर्फ 5 करोड़ 60 लाख रुपये के सिविल कार्य दिखाए थे। कायदे से उसकी क्षमता शून्य थी, लेकिन इसके बावजूद उसे नियमों को धता बताते हुए पहले 7 टेंडर में 54 करोड़ से ज्यादा का काम मिला और देखते-देखते कुल 159 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर थमा दिए गए। यह साफ तौर पर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

अब बात करते हैं 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' की, जिसका हाल इससे भी ज्यादा बेहाल है। झारखंड में 22 लाख 34 हजार पात्र ग्रामीण परिवारों की पहचान की गई थी, लेकिन केंद्र से लक्ष्य मिला सिर्फ 16 लाख 2 हजार का। नतीजा यह हुआ कि लगभग 28 प्रतिशत यानी 6 लाख 32 हजार गरीब परिवार इस योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित रह गए।

लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं होता! एक तरफ जहां वास्तविक गरीब आज भी पक्के मकान के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं प्रतीक्षा सूची में 2 लाख 90 हजार अपात्र लोगों के नाम जोड़ दिए गए थे, जिन्हें बाद में जांच के दौरान हटाया गया।

और तो और, जिस झारखंड को ओडीएफ (ODF) यानी खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है, वहां बनकर तैयार हो चुके लगभग 8 प्रतिशत पीएम आवासों में शौचालय तक नहीं बनाए गए हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही और लचर निगरानी पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।सवालों के घेरे में खड़ी झारखंड की व्यवस्था से अब जनता का सीधा सवाल है—आखिर गरीबों के सपनों और उनके हक के पैसों का यह सौदा कब तक चलता रहेगा?