झकझोर देने वाली तस्वीर : गिरिडीह की एक महिला टूटी झोपड़ी, खाने को संकट और सरकारी योजनाओं से कोसों दूर,जानिए हकीकत
गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. एक बेहद ही गरीब परिवार के जीवन यापन की ऐसी तस्वीर सामने आई जो एक बार सोचने पर मजबूर कर दे. राजधनवार विधानसभा क्षेत्र के तिसरी प्रखंड स्थित सिंघो पंचायत के लक्ष्मनिया टोला में एक महिला अपने तीन मासूम बच्चों के साथ बदहाली भरी जिंदगी जीने को मजबूर है. टूटी झोपड़ी, खाने का संकट और सरकारी योजनाओं से कोसों दूरी. वजह सिर्फ इतनी कि महिला के पास आधार कार्ड तक नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी योजनाओं का दावा जमीनी स्तर पर कितना सच है.
सरिता देवी की जिंदगी बनी संघर्ष की कहानी
गिरिडीह के तिसरी प्रखंड स्थित लक्ष्मनिया टोला में रहने वाली सरिता देवी की जिंदगी संघर्ष की कहानी बन चुकी है. पति की मौत के बाद दूसरी शादी भी उनका सहारा नहीं बन सका. प्रताड़ना के बाद उन्हें अपने तीन बच्चों के साथ घर छोड़ना पड़ा. अब सरिता देवी मायके में टूटी-फूटी मिट्टी की झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं. घर की हालत ऐसी है कि बारिश होने पर मिट्टी ढह जाती है और कई बार खाने तक का इंतजाम नहीं हो पाता.
बच्चों के साथ मां भीभूखे पेट गुजरती
सरिता देवी का कहना है कि कई रातें बच्चों के साथ भूखे पेट गुजरती हैं. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उनके पास आधार कार्ड नहीं है, जिसके कारण उन्हें राशन, पेंशन और सरकारी आवास जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा.
इस परिवार तक नहीं पहुंच रही सरकारी मदद
हैरानी की बात यह है कि यह मामला राजधनवार विधानसभा क्षेत्र का है. जहां से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बाबूलाल मरांडी प्रतिनिधित्व करते हैं. बावजूद इसके आज तक इस परिवार तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पाई है. ग्रामीणों और समाजसेवियों का कहना है कि कई बार प्रशासन को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. गांव के लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि सरिता देवी का जल्द आधार कार्ड बनवाया जाए और उन्हें राशन, आवास और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके.
प्रशासन से मदद की आस
फिलहाल सरिता देवी और उनके तीन बच्चे मदद की आस में दिन काट रहे हैं. अब देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन कब तक इस परिवार की सुध लेता है.
रांची से संवाददाता राहुल कुमार की रिपोर्ट





