जमशेदपुर में मलेरिया रोकथाम पर जोर : बीमारी की रोकथाम, जांच और उपचार को लेकर डीसी ने दी सलाह
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम में बढ़ते मलेरिया संक्रमण को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. मलेरिया की रोकथाम, जांच और उपचार को लेकर उपायुक्त राजीव रंजन ने प्रेस वार्ता कर जिले में चल रहे विशेष अभियान की जानकारी दी.
डीसी ने कहा कि प्रशासन के प्रयासों के साथ आम लोगों का सहयोग भी बेहद जरूरी है. बुखार को कभी भी सामान्य समझने की भूल नहीं करनी चाहिए.उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि जिले के संवेदनशील इलाकों में युद्धस्तर पर मलेरिया सर्विलांस, जांच, उपचार, इंडोर रेजिडुअल स्प्रे यानी आईआरएस और जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. लक्ष्य है कि हर संदिग्ध मरीज की 24 घंटे के अंदर जांच और इलाज सुनिश्चित किया जाए. सिविल सर्जन ने बताया कि 29 जून से 12 जुलाई तक जिले में 1 लाख 4 हजार 459 लोगों की मलेरिया जांच की गई. इनमें से 1 हजार 895 मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं. जिले की कुल पॉजिटिविटी दर 1.96 प्रतिशत दर्ज की गई है.
पोटका, डुमरिया, मुसाबनी और घाटशिला में सबसे अधिक मरीज मिलने के कारण इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी, फोकस्ड सर्विलांस, आईआरएस और त्वरित उपचार अभियान चलाया जा रहा है. वहीं,अर्बन मानगो में इस अवधि के दौरान एक भी मलेरिया मरीज नहीं मिला है. जबकि,बिरसानगर में केवल दो मामले सामने आए हैं.
उपायुक्त ने बताया कि जिले में अब तक मलेरिया से छह लोगों की मौत हुई है. जिनमें चार की मौत सेरेब्रल मलेरिया और दो की मौत मिक्स्ड इंफेक्शन के कारण हुई है. सभी मामलों की चिकित्सकीय समीक्षा की जा रही है. उन्होंने जिलेवासियों से अपील की है कि बुखार होने पर खुद दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर मलेरिया की जांच कराए. साथ ही घर के आसपास पानी जमा न होने दें, नियमित रूप से मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और स्वास्थ्य विभाग के सर्वे व आईआरएस अभियान में सहयोग करें. उपायुक्त ने कहा कि समय पर जांच और उपचार से मलेरिया से होने वाली गंभीर जटिलताओं और मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है.





