ग्रामीण विकास में एआई का समावेश : जेएसएलपीएस द्वारा राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ
रांची : झारखण्ड में ग्रामीण विकास कार्यों को अधिक प्रभावी,पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए,ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रोमोशन सोसाईटी (जेएसएलपीएस) द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का रांची केSIRD,हेहल में बुधवार को शुभारंभ किया गया.
इस कार्यशाला का उद्घाटन राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर अनन्य मित्तल, सीईओ-जेएसएलपीएस, उप सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, राकेश कुमार, सीओओ, जेएसएलपीएस, बिष्णु चरण परिदा, विनोद कुमार पांडेय, आईएएफ द नज इंस्टीट्यूट, डिजिटल एरे और सेल्सफोर्स सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे.
जेएसएलपीएस इस प्रकार की पहल करने वाला देश का पहला SRLM है. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से लगभग 450 कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा.
“एआई से सशक्त होगा ग्रामीण विकास” –मंत्री,ग्रामीण विकास विभाग
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “एआई आधारित यह प्रशिक्षण योजना निर्माण,क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा एक नया मानक स्थापित करेगा. हमारा लक्ष्य है कि इस तकनीक का लाभ अंतिम पंक्ति तक,विशेषकर स्वयं सहायता समूह (SHG)की दीदियों तक पहुंचे. वर्तमान समय में जहां एआई के संभावित नकारात्मक प्रभावों की चर्चा होती है,वहीं इसे सकारात्मक रूप से अपनाकर कार्यक्षमता बढ़ाना आवश्यक है.”
“भविष्य की कार्यकुशलता का आधार एआई” –सीईओ,जेएसएलपीएस
अनन्य मित्तल ने कहा, “भविष्य में कार्यकुशलता का आधार एआई होगा. हमें नवीनतम टूल्स और तकनीकों को समझकर उन्हें प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखना होगा.”
कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम प्रबंधक-एमआईएस,अमित जैन ने एआई के उपयोग,संभावनाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रथम चरण में राज्य स्तरीय पदाधिकारियों (SPMएवंPM)को प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसके पश्चात जिला एवं प्रखंड स्तर के कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही, SHGदीदियों एवं सामुदायिक नेताओं के लिए मास्टर ट्रेनर्स का एक समूह भी तैयार किया जाएगा.
कार्यशाला में द नज इंस्टीट्यूट,डिजिटल एरे,सेल्सफोर्स सहित अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सत्रों का संचालन किया जा रहा है. इस अवसर पर राज्य स्तर के सभी अधिकारी एवं कार्यक्रम प्रबंधक उपस्थित रहे. यह पहल झारखण्ड में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,जो ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाएगा.





