छात्राओं से कथित यौन दुर्व्यवहार पर सरकार सख्त : बक्सर में आरोपित शिक्षकों की गिरफ्तारी, पॉक्सो में कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल के निर्देश
पटना: बक्सर के डुमरांव में दो शिक्षकों पर नाबालिग छात्राओं के साथ गंभीर यौन दुर्व्यवहार,आपत्तिजनक वीडियो बनाने और प्रसारित करने के आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। शिक्षा मंत्री ने गिरफ्तारी,पॉक्सो के तहत कार्रवाई,स्पीडी ट्रायल और निलंबित शिक्षकों की बर्खास्तगी का प्रस्ताव मांगा है।
वीडियो वायरल हुआ तो सामने आया गंभीर मामला
बक्सर के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय से जुड़े मामले में दो शिक्षकों पर छात्राओं के साथ गंभीर यौन दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,करीब 12 नाबालिग छात्राओं से जुड़े आरोप सामने आने की बात कही गई है। आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आया।
आरोपों में छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने,उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने और धमकाने जैसी बातें भी सामने आई हैं। एक मामले में नाबालिग छात्रा को होटल ले जाकर यौन शोषण किए जाने का आरोप भी बताया गया है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस और विभागीय जांच पूरी होने के बाद होगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा—बच्चियों की सुरक्षा से समझौता नहीं
मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बक्सर के एसपी को दोनों आरोपित शिक्षकों की तत्काल गिरफ्तारी का निर्देश दिया है।
उन्होंने पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने तथा मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल के माध्यम से कराने को कहा,ताकि पीड़ित छात्राओं को शीघ्र न्याय मिल सके।
निलंबन के बाद अब बर्खास्तगी की तैयारी
दोनों शिक्षक पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रारंभिक विभागीय जांच के बाद दोनों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।
अब शिक्षा मंत्री ने बक्सर के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि दोनों निलंबित शिक्षकों की बर्खास्तगी का प्रस्ताव अविलंब शिक्षा विभाग को भेजा जाए।
यानी आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ सेवा संबंधी कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जा रही है।
पुलिस जांच में डिजिटल साक्ष्य भी अहम
मामले में कथित वीडियो और ऑडियो के अलावा मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। छात्राओं और उनके परिजनों के बयान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पुलिस आरोपों की वास्तविकता और पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस कार्रवाई की स्थिति को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है;इसलिए फिलहाल गिरफ्तारी और प्राथमिकी की अंतिम स्थिति को आधिकारिक पुलिस पुष्टि के अनुरूप ही दर्ज करना उचित होगा।
शिक्षक के भरोसे को तोड़ने वालों पर जीरो टॉलरेंस
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षक पर अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर भरोसा करते हैं। इस भरोसे को तोड़ने वाले के खिलाफ कठोरतम कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक के पवित्र दायित्व और पद की गरिमा के खिलाफ आचरण को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब स्कूलों में शिकायत व्यवस्था पर भी फोकस
मंत्री ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा,शिकायतों की त्वरित सुनवाई और संवेदनशील मामलों में कार्रवाई की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए।
इसका मतलब है कि मामला केवल दो आरोपित शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया की व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत सामने आई है।
बड़ा सवाल: स्कूल में भरोसा कैसे सुरक्षित रहे?
यह घटना केवल दो शिक्षकों पर लगे आरोपों का मामला नहीं है। यह उस भरोसे का सवाल है जिसके आधार पर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं।
सरकार की ओर से गिरफ्तारी,पॉक्सो के तहत कार्रवाई,स्पीडी ट्रायल और बर्खास्तगी के निर्देश का स्पष्ट संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई को टालने की गुंजाइश नहीं होगी।
हालांकि आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी, लेकिन शिक्षा व्यवस्था के लिए तत्काल प्राथमिकता स्पष्ट है—हर बच्चे को स्कूल में सुरक्षित वातावरण मिले और किसी शिकायत को दबने या लंबित रहने न दिया जाए।





