बुढ़मू : छोटे भाई-बहनों की देखभाल कर रहे 14 वर्षीय रोहित से झालसा सचिव ने की मुलाकात,पीएलवी को देखरेख की दी जिम्मेदारी

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रांची: बुढ़मू प्रखंड के सिदरौल गांव में तीन छोटे भाई-बहनों की देखभाल कर रहे 14 वर्षीय रोहित मामले पर झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सह न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद ने संज्ञान लिया. उनके निर्देश पर झालसा सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह न्याययुक्त अनिल कुमार मिश्र-1 के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया. संबंधित टीम सिदरौल गांव पहुंची और चारों बच्चों से बातचीत की. सभी बच्चे टूटे-फूटे घर में रहने को मजबूर हैं.

इन चार बच्चों में रोहित की उम्र 14 वर्ष जो अपने तीन छोटे भाई-बहनों की पूरी देखभाल करते हैं. 14 वर्षीय बच्चा अन्य तीन बच्चों के लिए खाना बनाता है और उनकी देखरेख करता है. इन बच्चों के पिता एक छोटे बच्चे को लेकर कमाने के लिए बाहर गए हैं.बच्चों की मां आठ माह पहले घर से बाहर निकल गई थी, जिसका आज तक पता नहीं चल सका. चारों बच्चे जिस झोपड़ीनुमा मकान में रहते हैं, उसकी स्थिति जर्जर हो चुकी है.

डालसा सचिव ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बुढ़मू के बीडीओ, डीसीपीओ रांची व सीडब्ल्यूसी से बातचीत कर सभी बच्चों के लिए गर्म कपड़े की व्यवस्था की. साथ ही बुढ़मू क्षेत्र के दो लोकल पीएलवी को बच्चों के देखरेख की जिम्मेदारी दी और दो बच्चे जिनका आधार कार्ड नहीं है, उनका आधार कार्ड बनवाने का भी निर्देश दिया.बुढ़मू बीडीओ से उन्होंने कहा कि संबंधित बच्चों के लिए अम्बेडकर आवास योजना के तहत जल्द ही आवास बनवाया जाएगा. डालसा सचिव राकेश रौशन ने बताया कि आधार कार्ड बन जाने के बाद सभी बच्चों को सीडब्ल्यूसी के माध्यम से स्पांसरशिप स्कीम से जोड़ा जाएगा. इस स्कीम के तहत सभी बच्चों को 4-4 हजार रुपये मिलेंगे. इसके अलावा एक बच्ची, जिसकी उम्र 12 वर्ष है, उसका कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन कराया जाएगा.

वहीं, बच्चों के माता-पिता से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है. सिदरौल मुखिया को निर्देश दिया गया है कि जब तक बच्चों को पुनर्वासित नहीं किया जाता है, तब तक संबंधित बच्चों की देखरेख व खाने-पीने का ध्यान रखें.

रांची से राजेश पाठक की रिपोर्ट