BJP विधायक हमलावर : ट्रेजरी में करोड़ो निकासी और भाषा नियमावली में सरकार की संशा साफ नहीं-सत्येंद्रनाथ तिवारी
गढ़वा:झारखण्ड के गढ़वा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने ट्रेजरी में करोडो रुपये के अवैध निकासी मामले मे बड़ा बयान दिया है. विधायक ने इसकी तुलना चारा घोटाला से की है. रमकंडा पहुंचे गढ़वा विधायक ने कहा की झारखण्ड में चारा घोटाला से भी बड़ा ट्रेजरी घोटाला हुआ है. अब यह आंकड़ा 100 करोड़ से पार हो गया है.
वित्त विभाग पर सवाल
सत्येंद्रनाथ तिवारी ने सवाल उठाते हुएकहा की राज्य में जिस कोषागार को पूरा हिसाब किताब रखने का जिम्मा है. वहीं यह गड़बड़ी हुई है. वित्त मंत्री आज सभी जगह जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन इसकी नियमित जांच क्यूं नहीं करायी गयी.
मुख्यमंत्री केशीशमहल पर कड़ा प्रहार
उन्होंने कहा कि आज झारखण्ड के मुख्यमंत्री एक अरब का अपना शीशमहल बना रहे हैं. इधर, राज्य के बच्चों को छात्रवृति का लाभ नहीं मिल रहा है. पैसे के अभाव में परीक्षा नहीं दे पा रहे. किसानों को धान बेचने के बाद भी पैसा नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा की झारखण्ड की ऐसी स्थिति हो गयी कि आम लोगों की बात कोई सुनने वाला नहीं है.
'10 सालों से शिक्षक पात्रता परीक्षा के इन्तजार में युवा'
विधायक ने आगे कहा की पढ़े लिखे झारखण्ड के युवा आज 10 सालों से झारखण्ड शिक्षक पात्रता परीक्षा के इन्तजार में हैं. कई युवाओं की उम्र ख़त्म हो गयी. अगर सरकार की मंशा साफ़ होती तो रघुवर सरकर की 2016 वाली नियमावली के आधार पर ही पात्रता परीक्षा आयोजित करा कर 26 हजार शिक्षकों के खाली पदों को भर सकती थी, लेकिन हेमंत सरकार भाषा के विवाद में इसे उलझा के रखा है. भोजपुरी, मगही, हिंदी को रीजनल भाषा के रूप में नहीं शामिल किया गया. जबकि, गढ़वा पलामू के लोग भोजपुरी, मगही ओर हिंदी जानते हैं.
भाषा नियमावली मेंभोजपुरी,मगही और हिंदी को रखा दूर
हेमंत सरकार पर हृमला बोलते हुए कहा कि लोगों की मांग थी कि रीजनल भाषा में भोजपुरी, मगही के साथ हिंदी को भी रखे, लेकिन नियमावली में सरकार ने इसे हटाकर कुडुख, नागपुरी, कुरमाली, उड़िया, बांग्ला को रखा, ताकि लोग इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाए और नियमावली पर रोक लगे. सरकार दो सालों से ओबीसी छात्रों को छात्रवृति नहीं दे पा रही है. उन्होंने कहा कि वे इस मामले को लेकर राज्यपाल से मिलकर यहां के छात्रों की समस्याओं को रखा. हालांकि अब सरकार ने नियमावली को रद्द कर दिया है., लेकिन फिर से कब परीक्षा होगी इसका कुछ पता नहीं है.
उन्होंने कहा की उन छात्रों का क्या होगा. जो बैल बकरी बेचकर शहरों में इस परीक्षा की तैयारी में लगे हए हैं. उन्होंने कहा कि इस सरकार में यह परीक्षा होना संभव नहीं है.





