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BIHAR NEWS : जीविका दीदियों के हाथों से तैयार चायपत्ती बनी बिहार के किशनगंज की पहचान

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पटना : बिहार राज्य में समूहों से जुड़ी जीविका दीदियां अपनी हुनर और मेहनत लगातार कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं. रसोई,सिलाई,पशुपालन,नर्सरी,लघु एवं कुटीर उद्योग के साथ अब उन्होंने दूसरे अन्य कई क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है. नई बानगी के तौर पर किशनगंज के पोठिया प्रखंड में इन दीदियों के हाथों चायपत्ती फैक्ट्री के संचालन के रूप में देखा जा सकता है. इस फैक्ट्री में दीदियों ने अपनी दक्षता के बल पर न सिर्फ रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं बल्कि दूसरों की जीविका का भी एक सशक्त माध्यम खड़ा किया है.

किशनगंज के पोठिया ब्लॉक में समूह से जुडीं दीदियां महानंदा एफपीसी (महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड) की ओर से संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई के सहारे व्यापक स्तर पर चायपत्ती का उत्पादन कर रही हैं. इस काम से दीदियों को वार्षिक तौर पर लाखों की आमदनी भी हो रही है. वर्ष 2002 में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाइ) के तहत जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) किशनगंज को एक विशेष परियोजना स्वीकृत की गई थी. इसे देखते हुए 2010 में किशनगंज के पोठिया प्रखंड के कुसियारी पंचायत स्थित कालीदास किस्मत में करीब 10 एकड़ भूमि पर 9.64 करोड़ रुपये की लागत से बिहार सरकार ने एक चाय कारखाना स्थापित किया. कारखाने की स्थापना का उद्देश्य चाय पत्ता की खेती और पत्ता तोड़ने वालों स्थानीय किसानों के संघ के माध्यम से कारखाने का संचालन करना था.

इसी बीच जीविका के माध्यम से महानंदा संघ बनाने का निर्णय लिया गया. नतीजा,14 जून 2021 को 10 प्रमोटर सदस्यों के सहारे महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया. एफपीसी से जुड़ी सभी महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं. आज कुल 45 दीदियां किसानों के यहां से खरीदकर लाए गए चाय पत्ता से चायपत्ती का उत्पादन कर रही हैं. इस कार्य से जुड़े कर्मियों की तनख्वाह 10 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक निर्धारित है.

जीविका समूह के अधिकारियों का कहना है कि जीविका दीदियों के हाथों पिछले सीजन में डेढ़ लाख किलो चायपत्ती तैयार किया गया था. इसमें से करीब एक लाख किलो से अधिक की चायपत्ती की बिक्री हो चुकी है. दीदियों के उत्साह,हुनर और बाजार में उनकी चायपत्ती की मांग को देखते हुए इस वर्ष दस लाख किलो (एक हजार टन) चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.