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BIHAR NEWS : 208 एकड़ में आकार लेगा नया विक्रमशिला, लौटेगी सदियों पुरानी शैक्षणिक विरासत

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पटना : राज्य सरकार ने नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्निमाण करवाने के बाद अब ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुराने गौरव को वापस लाने की कवायद तेज कर दी है. भागलपुर के कहलगांव प्रखंड में करीब208एकड़ भूमि में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी. इसके लिए बुधवार को भागलपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उस भूमि को शिक्षा विभाग को हस्तानांतरित कर दी. इसके बाद इसके पुनर्निर्माण कार्य में तेजी आएगी.

इतिहास के जानकारों के अनुसार5वीं शताब्दी ई. में गुप्त वंश के दौरान विश्व के सबसे प्राचीन आवासीय विश्वविद्यालयों में विक्रमशिला विश्वविद्यालय और नालंदा विश्वविद्यालय शामिल था. विक्रमशिला और नालंदा दोनों को पाल राजाओं द्वारा संरक्षण प्रदान किया गया था और दोनों में विद्वान एवं ज्ञान का आदान - प्रदान किया जाता था. बताया जाता है कि विक्रमशिला एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय था जो तांत्रिक और गुप्त विद्याओं में विशेषज्ञता रखता था. तांत्रिकवाद युग के दौरान यह फला-फूला. विक्रमशिला विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र,धर्मशास्त्र,व्याकरण,तत्त्वमीमांसा और तर्कशास्त्र जैसे विषयों की शिक्षा दी जाती थी.

इतिहासकारों का कहना है कि इस विश्वविद्यालय से कई प्रख्यात विद्वानों ने शिक्षा ग्रहण की,जिनमें अतीसा दीपांकर भी शामिल हैं,जिन्होंने तिब्बत में बौद्ध धर्म की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. नालंदा की तरह विक्रमशिला का भी पतन13वीं शताब्दी में बख्तियार खिजली के आक्रमण के कारण हुआ था.

सरकार ने नालंदा विश्वविद्यालय को एक अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के तौर पर फिर से स्थापित किया है. इसके बाद राज्य सरकार अब विक्रमशिला को विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित कराने जा रही है, ताकि इसका पुराना गौरव हासिल हो सके. इस विश्वविद्यालय के निर्माण के बाद विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए एक बेहतर संस्थान मिल जाएगा.