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BIHAR NEWS : सम्राट सरकार के फऱमान पर प्राइवेट स्कूल में कितना फॉलो होगा सरकारी रूल ? सवाल तो पूछेंगे

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पटना : बिहार में सम्राट सरकार ने लोगों की दुखती रग को पकड़ा और दर्द की दवा एक सोशल मीडिया पोस्ट से कर दी. प्राइवेट स्कूलों पर जो मनमानी का आरोप लगाया जाता था.. उसको लेकर गाइडलाइन जारी कर सम्राट चौधरी ने प्राइवेट स्कूलों को कंट्रोल में रहने और गाइडलाइन पर काम न करने पर नकेल कसने का संदेश दे दिया है जिसको लेकर अभिभावक देर आए पर दुरूस्त आए वाले भाव के साथ... सरकार की सराहना करने लगे हैं.

लेकिन बिहार की शिक्षा व्यवस्था की अजब विडम्बना भी देखिए... एक तरफ सरकार बुक...स्कूल ड्रेस...साइकिल...लंच ब्रेक में पौष्टिक आहार देने के अलावा... छात्रवृति भी देती है... ताकि सरकारी स्कूलों में... विद्यार्थियों की संख्या और उनकी उपस्थित में सुधार हो... दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूल हैं... जहां मनमाना फीस... किताब कॉपी कपड़े भी निर्धारित दुकान से लेने की बाध्यता रखने के साथ ही... सत्र की शुरूआत में री-एडमिशन और पूरे साल... अलग अलग एक्टिविटी के नाम पर... पैसा लेने के बहाने तलाशने के लिए.. बदनाम होने के बाद भी... वहां बच्चों की भीड़... कम होने का नाम नहीं लेती. सरकारी स्कूल की सुविधा पर प्राइवेट स्कूल का कथित आर्थिक शोषण कैसे हावी हो जाता है. अब इसकी वजह क्या बताएं... ये सरकारी स्कूल की छवि और प्राइवेट स्कूल के स्टैंडर से जोड़ा जा सकता है. उस मानसिकता से जोड़ा जा सकता है. जो लोगों में दोनों तरह की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर समय के साथ बनती गई. इसके लिए जिम्मेदार किसे कहा जाए... सरकारी शिक्षा व्यवस्था से असंतुष्ट अभिवाक को या प्राइवेट स्कूल में भारी भरकम खर्च वहन कर छात्रों के भविष्य को लेकर संतुष्टी के भाव से अभिभूत होते अभिवाक को.

इन सबके बीच क्या किसी ने ये सोचा कि प्राइवेट स्कूल संचालक अपने बलबूते कैसे संसाधन, सुविधा, शौक्षणिक गुणवत्ता और दूसरे स्कूलों से कम्पिटिशन में मानकों को पूरा करते हुए खुद को अपडेट और अपग्रेड करते रहते हैं. उसमें कितनी आमदनी होती है और कितना खर्च. अब प्राइवेट स्कूल वाले समाज सेवा के लिए तो संस्थान नहीं चला रहे हैं. सरकार से सब्सिडी मिल रही हो ऐसा भी नहीं हैं. ऐसे में अगर सरकार आमदनी के साधन में कटौती का दबाव बनाएगी तो स्कूलों का गुणवत्ता बनाए रखते हुए संचालन कैसे होगा. ऐसे में सवाल तो पूछेंगे कि प्राइवेट स्कूल में कितना फॉलो होगा सरकारी रूल

पटना से दीपक शर्मा