Hindi News / थैलेसीमिया पीड़ित 5 बच्चों का नया बैच बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए भेजा...

BIHAR NEWS : थैलेसीमिया पीड़ित 5 बच्चों का नया बैच बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया वेल्लोर- स्वास्थ्य मंत्री निशांत

Edited By:  |
bihar news bihar news

पटना: बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और स्वस्थ भविष्य प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है.

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना के अंतर्गत थैलेसीमिया (मेजर) से पीड़ित 5 बच्चों के नए बैच को आज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए भेजा गया. यह योजना के तहत भेजा जाने वाला आठवां बैच है. इससे पूर्व सात बैचों में कुल 43 बच्चों का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जा चुका है,जिससे उनके जीवन में नई आशा का संचार हुआ है.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एनडीए के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 6 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना को मंत्रिमंडल की स्वीकृति प्रदान की गई थी. इस योजना का उद्देश्य थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को स्थायी उपचार उपलब्ध कराकर उन्हें सामान्य एवं स्वस्थ जीवन प्रदान करना है.

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार थैलेसीमिया,हीमोफिलिया और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों के उपचार एवं देखभाल के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है. इसी कड़ी में राज्य में 6 एकीकृत डे-केयर केंद्र स्थापित किए गए हैं,जहां मरीजों को जांच,रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन),आयरन चेलेटिंग दवाएं तथा एंटी हेमोफिलिक फैक्टर (एएचएफ) सहित आवश्यक चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

निशांत ने कहा कि 12 वर्ष से कम आयु के पात्र बच्चों के लिए संचालित इस योजना के तहत बिहार सरकार ने सीएमसी वेल्लोर के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है. ऐसे बच्चों,जिनका भाई या बहन एचएलए मैच करता है,उनका सीएमसी वेल्लोर में पूर्णतः निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जाता है. बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं उपचार की संपूर्ण प्रक्रिया पर राज्य सरकार प्रति मरीज लगभग 15 लाख रुपये व्यय करती है. इस राशि में मरीज,डोनर एवं अभिभावकों की हवाई यात्रा,उपचार,आवास,भोजन तथा अन्य आवश्यक खर्च शामिल होते हैं,ताकि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे के इलाज में बाधा न बने.