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आस्था के आंगन में देशभक्ति का जश्न : बिहार के मठ-मंदिरों में शान से फहरेगा तिरंगा, मलिन बस्तियों में बंटेगी 'खुशियों की जलेबी'

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पटना :स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं,बल्कि हर भारतीय की आत्मा और स्वाभिमान का उत्सव है. इस वर्ष बिहार में आजादी का यह जश्न आस्था और देशभक्ति के एक अद्भुत संगम का गवाह बनने जा रहा है. बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणबीर नंदन ने राज्य के सभी मठ-मंदिरों,कबीर मठों और धर्मशालाओं से एक बेहद खास और प्रेरणादायक अपील की है. उन्होंने आह्वान किया है कि15अगस्त के पावन अवसर पर सभी धार्मिक संस्थान पूरी भव्यता और उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाएं और राष्ट्रप्रेम का एक नया उदाहरण पेश करें.

प्रो. नंदन का यह आह्वान केवल रस्म अदायगी या झंडा फहराने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने की एक खूबसूरत पहल है. उन्होंने सभी धार्मिक संस्थानों के प्रबंधकों,साधु-संतों और पुजारियों से आग्रह किया है कि वे अपने परिसरों में पूरी श्रद्धा और सौंदर्य के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएं. कल्पना कीजिए,जब मंदिरों की घंटियों,शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आसमान में तिरंगा लहराएगा,तो वह दृश्य न केवल मन को मोहने वाला होगा,बल्कि हर नागरिक के भीतर राष्ट्रप्रेम की एक नई और असीम ऊर्जा का संचार करेगा.

इस पुनीत अवसर पर इंसानियत और सेवा का सबसे बड़ा संदेश देते हुए प्रो. नंदन ने एक बेहद मार्मिक और सामाजिक सरोकार से जुड़ी अपील की है. उन्होंने कहा है कि ध्वजारोहण के पश्चात सभी मठ-मंदिरों के लोग अपने आसपास की गरीब और मलिन बस्तियों का रुख करें और वहां के निवासियों,विशेषकर बच्चों के बीच जलेबी का वितरण करें. आजादी की खुशी चंद लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. स्वतंत्रता दिवस की मिठास जब एक गरीब और वंचित बच्चे के होठों तक पहुंचेगी,तब जाकर आजादी का सही अर्थ और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का सपना साकार होगा.

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि हमारे धार्मिक स्थल केवल पूजा-पाठ और कर्मकांड के केंद्र नहीं हैं,बल्कि वे सामाजिक समरसता,समानता और मानव कल्याण के सबसे बड़े दूत हैं. धर्म का मूल उद्देश्य ही नर में नारायण की सेवा करना है. जब मठों और मंदिरों के प्रतिनिधि खुद चलकर गरीब बस्तियों में जाएंगे,तो इससे समाज में छुआछूत,भेदभाव और ऊंच-नीच की खाई पटेगी और एक मजबूत,एकजुट समाज का निर्माण होगा.