असम में सीएम हेमंत ने फूंका बिगुल : तिनसुकिया में आयोजित आदिवासी महासभा में हुए शामिल,एसटी समाज की हालात पर जतायी चिंता
असम/रांची:झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को एक दिवसीय असम दौरे पर गए हैं. असम चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. इसी क्रम में हेमंत सोरेन असम के तिनसुकिया में ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ आसाम (AASAA) द्वारा आयोजित आदिवासी महासभा में शामिल हुए हैं. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए. मौके पर झारखंड एवं असम के आदिवासियों द्वारा आदिवासी परंपरा, संस्कृति और कला की प्रस्तुत की. इस दौरान सीएम हेमंत ने विशाल आदिवासी महासभा को संबोधित किया.
आजादी के समय से आदिवासियों का योगदान
कार्यक्रम में आदिवासियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जब हमारा देश गुलामी की जंजीरों से जकड़ा हुआ था उस वक्त आजादी का पहला बिगुल फूंकने वाले हमारे आदिवासी समाज के वीर ही थे. आदिवासी समाज अपनी परंपरा संस्कृति के साथ अपने हक और अधिकार एवं जल, जंगल और जमीन की लड़ाई के लिए सदियों से लड़ता रहा है. आज हम सभी आदिवासी समाज के लोग राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक रूप से कमजोर है और इसे कमजोर करने में सामंतवादी सोच वाले लोगों का बड़ा हाथ हैं. उन्हें लगता है कि यदि आदिवासी, दलित, शोषित, वंचित यदि शिक्षित और संगठित हो जाएंगे तो उनके घरों में छोटे-मोटे काम करने वाले लोग कहां से आएंगे. ये सामंतवादी लोगों ने तो बाबा साहेब को भी नीचा दिखाने से नहीं चुके.
आदिवासी एकजुट होकर करेंगेविद्रोह
हेमंत सोरेन ने वहां आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि असम में रह रहे झारखंड के आदिवासियों पर अक्सर अत्याचार होते रहे और आज इस महासभा में मैं अपने लोगों से जुड़े उन सभी समस्याओं को सुनाने आया हूं. उन्होंने असम के मुख्यमंत्री से मांग की है कि यदि झारखंड के आदिवासियों पर या आसाम के आदिवासियों पर किसी भी प्रकार का अत्याचार होता है तो न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश के आदिवासी एकजुट होकर विद्रोह करेंगे.
बीजेपी ने देश को आर्थिक रूप से कमजोर
सीएम हेमंत सोरेन ने ये भी कहा कि झारखंड देश की अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा योगदान देने वाला राज्य है लेकिन, यहां की जनता का हाल बहुत ही बुरा है. इसलिए हमने विश्व पटल पर वैसे लोगों को झारखंड में आने का निमंत्रण दिया है जो हमारे संसाधनों की सही कीमत दे सके. उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब एक आदिवासी मुख्यमंत्री वैश्विक स्तर पर देश और राज्य का प्रतिनिधित्व किया. वहीं, उन्होंने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज देश की सरकार व्यापारी बनकर रह गई है. आज विश्व में रुपए की वैल्यू कम हो गई है, देश की स्थिति अच्छी नहीं है. महंगाई के नाम पर सत्ता में आने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है. नोटबंदी, जीएसटी जैसी योजनाओं से देश की जनता आर्थिक रूप से कमजोर हो गई है.
फूट डालो और राज करो की नीति
वहीं, उन्होंने सभी आदिवासियों से एकजुट होने, खुद को शिक्षित करने और आर्थिक सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक रूप से मजबूत होने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लोग जाति और धर्म के नाम पर लड़ाई करवा रहे हैं. फूट डालो और राज करो की नीति का सही उपयोग भारतीय जनता पार्टी कर रही है.





