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अब गांव में ही मिलेगा भविष्य : नालंदा का नया डेयरी प्लांट बनेगा हजारों सपनों का सहारा

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पटना/नालंदा: बिहार में लगभग70प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है. ऐसे में बिहार में डेयरी का विकास किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है. इसी सोच के साथ बिहार में डेयरी क्षेत्र लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है. नए डेयरी प्लांट,आधुनिक सुविधाएं और किसानों के हित में उठाए जा रहे कदम दूध उत्पादन के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ा रहे हैं. डेयरी विकास की यह नई रफ्तार रोजगार,आत्मनिर्भरता और समृद्ध बिहार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नालंदा जिले में प्रतिदिन20मीट्रिक टन क्षमता वाले दही एवं लस्सी प्लांट का शिलान्यास किया है. इस प्लांट की स्थापना से दुग्ध प्रसंस्करण को नई गति मिलेगी और डेयरी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. डेयरी उद्योग को केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रखते हुए उसे बहुआयामी स्वरूप देने के उद्देश्य से कॉम्फेड द्वारा संचालित एचपीसीएल पेट्रोल पंप का भी शिलान्यास किया जाएगा.

डेयरी परिसर के समीप पेट्रोल पंप स्थापित होने से दुग्ध परिवहन में लगे वाहनों को ईंधन के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा,जिससे समय और परिवहन लागत दोनों में कमी आएगी. इसके साथ ही'सुधा कैफेटेरिया'की भी शुरुआत की जाएगी. यह कैफेटेरिया स्थानीय लोगों,किसानों और राहगीरों के लिए एक सुविधाजनक केंद्र होगा,जहां उन्हें ताजे,गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय सुधा दुग्ध उत्पाद सीधे उपलब्ध हो सकेंगे.

डेयरी क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलाव,किसानों को मिलने वाले नए अवसर,डेयरी उद्योग के भविष्य और विकास की नई संभावनाओं के बारे में डेयरी,मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक बताते हैं कि,डेयरी सेक्टर का कंट्रीब्यूशन विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में काफी बेहतर है. बिहार में दही का डिमांड काफी ज्यादा होने से दही का प्लांट काफी उपयोगी है. बिहार के अलावा इसको नॉर्थ ईस्ट,बंगाल और झारखंड में भी भेजा जाएगा. नया प्लांट शुरू होने से उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी प्रोडक्ट मिलेंगे और कॉम्फेड का व्यापारिक दायरा भी कई गुना बढ़ जाएगा.

विशेषज्ञों के अनुसार कच्चा दूध जल्दी खराब हो जाता है,लेकिन जब उसे दही,लस्सी या अन्य उत्पादों में बदला जाता है,तो न केवल उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ती है,बल्कि बाजार में उसकी कीमत भी बेहतर मिलती है. इस20एमटीपीडी क्षमता वाले प्लांट के शुरू होने से नालंदा डेयरी की प्रसंस्करण क्षमता में भारी इजाफा होगा. स्थानीय किसानों का दूध आसानी से खप सकेगा और बाजार में सुधा के दही तथा लस्सी उत्पादों की उपलब्धता भी बढ़ेगी,जिससे गर्मी और अन्य मौसमों में उपभोक्ताओं की मांग पूरी की जा सकेगी.

नालंदा को राज्य के प्रमुख डेयरी हब के रूप में उभारने की पूरी तैयारी कर ली गई है. यह पहल दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार,मूल्य संवर्धन और आय बढ़ाने के अवसर प्रदान करेगी,साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

स्थानीय लोग और कर्मचारियों की सुनिए

पहले रोजगार के लिए लुधियाना जाना पड़ता था,लेकिन अब अपने ही घर के पास रोजगार मिलने से मैं परिवार के साथ रह पा रहा हूँ. इस अवसर के लिए मैं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं बिहार सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ.

अजय प्रसाद,कर्मचारी

स्थानीय लोग काफी खुश है. नालंदा डेयरी की यह नई परियोजना इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने में निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगी.

सृजन सन्नी,स्थानीय निवासी

महिला होकर अपने घर के पास नौकरी करना अपने आप में सुखद होता है. नालंदा जिले के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है.

प्रियंका कुमारी,कर्मचारी