जंगली हाथियों के झूंड का उत्पात : सरायकेला में हाथियों के झूंड ने कई घरों में लगायी आग, घरों में रखे अनाज को बनाया निवाला


सरायकेलामें इनदिनों हाथियों ने तबाही मचा रखी है. कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत चांडिल डैम विस्थापित क्षेत्र झापागड़ा बनगड़ा में कई दिनों से जंगली हाथियों ने डेरा जमाये रखा है. हाथियों ने कई घरों में रखे अनाज को अपना निवाला बना लिया. साथ ही हाथियों ने बिजली पोल को भी नुकसान पहुंचा. इससे शॉर्ट सर्किट हुआ और कई झोपड़ियां जलकर राख हो गई. मामला ओड़िया पंचायत के कुमारी गांव का है. यहां शार्ट सर्किट से आठ घर जलकर राख हो गया. घरों में रखे अनाज, कागजात जल गये. कई मवेशियों की जान चली गई. इससे भारी क्षति हुआ. पहले हाथियों से तबाही और अब घर जलने से लोगों के सामने भारी मुसीबत आ गई है. कई ग्रामीण स्कूल में शरण लेने को मजबूर हैं.
चांडिल वन क्षेत्र पदाधिकारी मैनेजर मिर्धा ने बताया कि जंगली हाथी ग्रुप में विचरण करते हैं. भोजन पानी की तलाश में हाथियों का झूंड गांव पहुंच गया है. साथ ही बिजली पोल और तारों को क्षतिग्रस्त कर दिया है. इससे शॉर्ट सर्किट हुआ और कई घरों में आग लग गई. साथ ही उन्होंने बताया कि विभाग की टीम गांव पहुंच गई है. पीड़ितों को मुआवजा दियटा जायेगा. साथ ही लोगों से उन्होंने तिरपाल की व्यवस्था करने की मांग की है.
कुकडू प्रखण्ड के मधुश्री महतो जिला परिषद उपाध्यक्ष ने पूर्व में चांडिल वन क्षेत्र पदाधिकारी वह वनपाल ,वन रक्षित को हाथियों के झूंड का गांव में होने की सूचना दी थी. जिसके बाद एलिफैंट ड्राइव टीम को गांव भेजने की बात कही गई थी.समाजसेवी सुनील महतो ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है. साथ ही कहा कि दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं होने की वजह से हाथियों का कई झुंड ईचागढ़ विधानसभा में विचरण कर रहा है. हाथियों के डर से शाम के वक्त से ही ग्रामीण घरों से निकलना बंद कर देते हैं.
आपको बता दें केन्द्र और राज्य सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये वन एवं पर्यावरण विभाग को मुहैया कराती है. ये राशि जंगल और जंगली जीवजंतु की सुरक्षा के लिये खर्च करने होते हैं. इसके बावजूद भोजन पानी के लिये हाथियों के झूंड को भटकना पड़ रहा है. भोजन पानी की तलाश में जंगल छोड़ गांव पहुंच गये हैं. आसपास के पलाश की जंगल और चांडिल डैम जलाशय के किनारे डेरा डाले हुए हैं. इसको लेकर ग्रामीण कई बार वन विभाग के खिलाफ आक्रोश भी जाते चुके हैं.