भाषा विवाद पर सियासत तेज : समाधान निकलेगा या बढ़ेगी तकरार ? कमिटी पर बड़ा जिम्मा
भाषा के कारण भसड़ देशभर में मचती रहती है, मुद्दा सामाजिक है पर माद्दा भरपुर सियासी। आठंवी अनुसूची वाला भाषाई संघर्ष किसी से छिपा नहीं है चुनावी दौर में कुछ राज्यो में स्थानीय भाषाई विवाद को सियासी गोलबंदी की वजह राजनीतिक लोगों की ओर से बनाई जाती है। चार कोस पर पानी बदले आठ कोस पर वाणी वाली कहावत जिस देश में प्रचलित है। वहां ये विवाद सामाजिक दिखाई जाती है पर रंग सियासी लिए होती है। इसी कड़ी में झारखंड भी विवादित राज्यों की लिस्ट में शामिल हो चुका है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि जेटेट में भाषा को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए गठित पांच मंत्रियों की विशेष कमेटी की पहली बैठक बेनतिजा रही। कमेटी के समन्वयक सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को कार्मिक विभाग से स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर, अगली बैठक से पहले पूरी जानकारी देने को कहा गया है। इधर विवाद के बीच परीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अब आवेदन लिए जाने और परिक्षा दिए जाने के बीच नियमावली में बदलाव पूरी प्रक्रिया को अटका सकता है, तो मान कर चला जाए कि इस बार परीक्षा से जुड़ा भाषाई विवाद बरकरार रहने वाला है।
समाधान निकलेगा या बढ़ेगी तकरार ?
दिलचस्प बात ये है कि बैठक में कार्मिक विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने विवाद के पीछे तकनीकि भूल या सियासी मंशा की ओर इशारा किया है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि 2011 की जनगणना के आधार पर भोजपुरी और मगही बोलने वालों की संख्या उड़िया और बांग्ला भाषियों से चार गुना अधिक है इतना ही नहीं स्थानीयता को नई नियमावली का आधार बताने वाले कमिटी को ये कैसे समझाएंगे कि तीन लाख लोगों से जुड़ी संथाल परगना की प्रमुख भाषा कुरमाली को जगह नहीं मिली।
कमिटी पर बड़ा जिम्मा
दूसरी राजभाषा मैथिली के साथ राज्य सरकार और मैथिल समाज का अपमान नहीं मैथिली भाषा को लिस्ट से बाहर रखना केवल क्षेत्रीय भाषाओं को ही नहीं, बल्कि असुर, बिरहोर और मालतो जैसी जनजातीय भाषाओं को भी सूची से बाहर कर दिए जाने पर कमेटी सदस्यों ने गंभीर माना पर मंथन से भाषाई हित में अमृत निकलेगा या सियासी मंशा मथने पर विष जो भाषाई विवाद को और कटु बनाएगा और समाज में विद्वेष नजरे सबकी हेमंत सोरेने की गठित मंत्रियों की कमेटी पर टिकी है जिसकी पहली बैठक बेनतीजा रही, देखना होगा अब आगे क्या होता है।
पटना डेस्क से दीपक शर्मा की रिपोर्ट





