खेल से पहचान, प्रतिभा से परिवर्तन : बिहार खेल विभाग के दो वर्ष और एक नए युग की शुरुआत

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पटना : बिहार में खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं,बल्कि सामाजिक परिवर्तन,युवा सशक्तिकरण और राज्य की नई पहचान का माध्यम बन चुका है। 9 जनवरी 2024 को गठित बिहार खेल विभाग ने अपने दो वर्षों के सफर में यह स्पष्ट कर दिया है कि खेल विकास अब योजनाओं तक सीमित नहीं,बल्कि एक संगठित,समावेशी और दीर्घकालिक आंदोलन का रूप ले चुका है। इन दो वर्षों ने बिहार को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है,जहाँ से वर्ष 2026 एक नई खेल-दृष्टि और ऐतिहासिक विस्तार की शुरुआत बनेगा।

बिहार के खेल परिदृश्य में यह बदलाव अचानक नहीं आया। अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण और संरचित कोचिंग की दिशा तय की,वहीं उसी वर्ष माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटित बिहार खेल विश्वविद्यालय,राजगीर ने खेल को शिक्षा,शोध और करियर से जोड़ने का स्थायी ढांचा तैयार किया। इन संस्थानों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि बिहार में खेल अब विकल्प नहीं,बल्कि भविष्य का मार्ग है।

खेल विभाग ने बीते दो वर्षों में अवसंरचना को केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं,बल्कि अवसरों की जमीन के रूप में विकसित किया है। जिला मुख्यालयों से लेकर पंचायतों तक फैली खेल सुविधाओं ने बच्चों,युवाओं और महिलाओं के लिए खेल को सुलभ बनाया है। प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियम,जिला खेल भवन सह जिमनैजियम और गांवों में विकसित खेल मैदानों ने खेल को शहरों की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया है। वर्ष 2025 में ही 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियमों का पूर्ण होना इस बदलाव का स्पष्ट उदाहरण है।

बिहार ने खुद को केवल प्रशिक्षण राज्य के रूप में नहीं,बल्कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के विश्वसनीय मेजबान के रूप में भी स्थापित किया है। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी,सेपकटाकरा वर्ल्ड कप,एशियन रग्बी सेवन्स,खेलो इंडिया यूथ गेम्स,हीरो एशिया कप हॉकी और ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे आयोजनों ने यह साबित किया कि बिहार वैश्विक खेल मानकों पर खरा उतरने की क्षमता रखता है।

खिलाड़ी विकास की सोच में भी बुनियादी बदलाव हुआ है।‘मशाल’जैसी व्यापक प्रतिभा खोज पहल ने लाखों बच्चों को खेल से जोड़ा,जबकि एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूलों और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार ने प्रतिभा को निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस,राजगीर सहित विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से अब बिहार में खिलाड़ी अपने ही राज्य में उच्च स्तरीय तैयारी कर पा रहे हैं।

खेल विभाग ने शासन को भी खिलाड़ी-केंद्रित बनाया है। पंचायत स्तर तक गठित खेल क्लबों ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूती दी है,वहीं छात्रवृत्ति,सरकारी नियुक्ति,प्रोत्साहन राशि और कल्याणकारी योजनाओं ने यह भरोसा दिया है कि बिहार में खेल प्रतिभा का सम्मान सुरक्षित है। पदक जीतने वाले खिलाड़ी अब केवल प्रशंसा नहीं,बल्कि स्थायी अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं।

वर्ष 2026 बिहार खेल विभाग के लिए आत्मविश्वास और विस्तार का वर्ष होगा। सात निश्चय योजना (03) के अंतर्गत पटना में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी,जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र,एकलव्य खेल केंद्रों का संचालन,नई छात्रवृत्ति प्रक्रियाएँ और खेल प्रशासन में बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ—ये सभी पहल बिहार को खेल-आधारित विकास मॉडल की ओर ले जाएँगी।

दो वर्षों में बिहार खेल विभाग ने यह सिद्ध किया है कि सही नीति,स्पष्ट दृष्टि और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ खेल राज्य की पहचान बदल सकते हैं। विकसित भारत 2047 और गौरवशाली बिहार 2047 के संकल्प के साथ,बिहार अब खेलों के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है। वर्ष 2026 इसी नए युग की औपचारिक शुरुआत है।

पटना से अंकिता की रिपोर्ट--