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झारखंड में बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर सख्ती : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुरूप तैयार होगी नीति-अपर मुख्य सचिव

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रांची: झारखंड में बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के लिए नई कॉम्प्रिहेंसिव गाइडलाइन तैयार करने का निर्णय लिया गया.

अपर मुख्य सचिव का सख्त निर्देश

बैठक में अपर मुख्य सचिव ने नई गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार करना का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि इसका पालन राज्य के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों में करना अनिवार्य होगा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि कचरा प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी,क्योंकि इसका सीधा असर पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य पर पड़ता है.

राज्य में पांच वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटीसंचालित

बैठक में डीआईसी डॉ.सिद्धार्थ सान्याल और डॉ. रंजीत ने जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य में पांच कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी कार्यरत हैं, जहां कचरे का सुरक्षित निस्तारण किया जा रहा है.

बारकोडिंग और जीपीएस ट्रैकिंग होगी मजबूत

नई गाइडलाइन के तहत कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा. कचरे के उठाव से लेकर अंतिम निस्तारण तक बारकोडिंग और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित हो सके.

48 घंटे से अधिक कचरा रखने पर लगेगी रोक

गाइडलाइन में यह भी प्रावधान होगा कि बिना उपचार वाले बायो-मेडिकल कचरे को 48 घंटे से अधिक समय तक संग्रहित नहीं किया जा सकेगा. इससे संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी.

नियम तोड़ने पंजीकरण रद्द तक संभव

नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसमें पर्यावरण मुआवजा दंड लगाने के साथ-साथ संबंधित संस्थान का पंजीकरण रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल होगी.

दुर्गम क्षेत्रों में ‘डीप बरियल’ पद्धति पर जोर

बैठक में निर्देश दिया गया कि राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में बायो-मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए ‘डीप बरियल’ जैसी वैज्ञानिक पद्धति का मानकों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था की उम्मीद

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. नई गाइडलाइन लागू होने के बाद राज्य में बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की उम्मीद जताई गई है.

रांची से संवाददाता राहुल कुमार की रिपोर्ट