प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार का आरोप : नवादा के गैरबा गांव के सैकड़ों ग्रामीण आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर, ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग”

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Hundreds of villagers in Gairba village of Nawada are still forced to live in huts; the villagers have demanded an investigation and action. Hundreds of villagers in Gairba village of Nawada are still forced to live in huts; the villagers have demanded an investigation and action.

डेस्क:-सरकारी दावों की खुली पोल

हम सिर्फ जनगणना और वोट देने के लिए बने हैं” — सरकारी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

देश आज़ादी के अमृत महोत्सव का जश्न मना रहा है, लेकिन बिहार के नवादा ज़िले के रजौली प्रखंड अंतर्गत बहादुर पुर पंचायत के गैरबा गाँव की तस्वीर आज भी बदहाली की कहानी ब्याँ कर रही है। आज़ादी के दशकों बाद भी यह गाँव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों में गहरा रोष है और उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन उन्हें केवल एक “संख्या” मानते हैं, जिसका उपयोग जनगणना और चुनाव के समय वोट बैंक के रूप में किया जाता है।


जब पत्रकारों ने गाँव का दौरा किया, तो विकास के सरकारी दावों की वास्तविकता सामने आ गई। गाँव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। गरीबी की स्थिति यह है कि अधिकांश घरों में न तो निजी चापाकल है और न ही शौचालय। पूरी मुसहरी में आज भी बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का घोर अभाव है।

ग्रामीणों का आरोप है कि योग्य परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। इसके बदले उन्हें केवल तारीख पर तारीख दी गई और बिचौलियों के माध्यम से अवैध रूप से पैसों की उगाही की गई। गाँव में जल निकासी के लिए एक भी पक्की नाली नहीं है। बरसात के दिनों में पानी जमा होने से आपसी विवाद तक की स्थिति बन जाती है।


गाँव के सरकारी विद्यालय की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कच्ची सड़कों और गंदे पानी से भरी गलियों ने ग्रामीणों का जीवन नारकीय बना दिया है।

ग्रामीणों की पीड़ा

ग्रामीणों का कहना है—सरकार को हमारी याद तभी आती है जब लोगों की गिनती करनी होती है या चुनाव में वोट चाहिए होता है। हम गरीब लोग सिर्फ जनगणना और मतगणना के लिए बने हैं। जब सुविधाओं की बारी आती है, तो हमारे गाँव का नाम सरकारी फाइलों से गायब हो जाता है।”


रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप

कई महिलाओं ने वर्तमान मुखिया एवं मन्नू नामक व्यक्ति पर आवास योजना के नाम पर रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। एक ग्रामीण ने बताया कि कई बार आवेदन देने के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।

प्रशासनिक अनदेखी

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता, चुनाव जीतने के बाद गाँव की ओर मुड़कर भी नहीं देखते। योजनाएँ काग़ज़ों में तो आती हैं, लेकिन ज़मीन पर उतरने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं।


हमारा उद्देश्य इन दबे-कुचले और उपेक्षित ग्रामीणों की आवाज़ प्रशासन तक पहुँचाना है।

क्या वास्तव में इन ग्रामीणों का अधिकार सिर्फ वोट देना भर है?

क्या उन्हें बेहतर सड़क,नाली और स्वच्छ जीवन का अधिकार नहीं है?

अब आवश्यकता है कि ज़िला प्रशासन और स्थानीय विधायक इस गंभीर मामले पर तत्काल संज्ञान लें और गैरबा गाँव को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ें।


रजौली नवादासेदिनेश कुमार की रिपोर्ट