लापरवाह लोगों का क्या हो इलाज ? : होटल से हॉस्पिटल तक हादसों से हाहाकार, कौन जिम्मेदार ?
होटल से लेकर हॉस्पिटल तक हादसों ने हाहाकार मचा रखा है। आराम के पल आफत के पल बन गए, स्वास्थ्य लाभ करते लोगों की सांसे उख़ड़ गई, लापरवाही की आग के आगोश में आए लोगों का दर्दनाक अंजाम दुनिया ने देखा। मृतात्मा की शांति की कामना की, दुख जताया, सांत्वना दी, मुआवजा घोषित किया और फिर आगे बढ़ गए। जबकि जरूरत थी ऐसे हादसों को उदाहरण बनाने की, तैयारी पुख्ता करने की, नियमों के अनुपालन से लेकर फायर फायटिंग तक की।

सरकारी, संस्थागत और निजी स्तर पर आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्था बेहतर हो, कारगर हो। ऐसे हादसे को उदाहरण बनाया जाए, ये सुनिश्चित करने के लिए कि जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो और तय हो जवाबदेह के जिम्मेदारी का समुचित पालन न करने पर किन किन लोगों को हर स्तर पर क्या सजा मिले।
हॉस्पिटल में हुआ हादसा तो हृदयविदारक है ही अभी-अभी होने के कारण देख सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं लेकिन पटना जंक्शन के सामने होटल में जो हुआ था उस हादसे की तपिश लोग भूल गए हों ऐसा भी नहीं है। दिल्ली के होटल में हुए हादसे ने वो याद फिर ताजा कर दी। होटल में हुई लापरवाही की बात चल ही रही थी कि तभी हॉस्पिटल में हुए हादसे ने हमारी तैयारी पर और हादसों से हमने क्या सबक लिया इस पर और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

ऐसे भी नहीं की हम अग्निकांड को लेकर सचेत नहीं। बिहार अग्निशमन सेवा और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सभी जिलों में आग से बचाव के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाता रहा है। स्कूलो में बच्चों को बचाव के तरीके हर शनिवार सिखाए जा रहे हैं। कॉलनी में कार्यक्रम के जरिए लोगों को भी तैयार किया जा रहा। सब होने के बाद भी लापरवाह लोगों का क्या इलाज हो इसका जवाब किसी के पास नहीं है। नियम बताते हैं कि संस्थानों में आपात स्थिति से निपटने की सुविधा की जांच को लेकर गाइडलाइन निर्धारित है, जांच करने वाले लोग तय हैं, पर ये व्यवस्था कारगर है तो हादसों में लोग हताहत क्यों हो रहे और कारगर नहीं को उन पर क्या कार्रवाई हो रही है ये बड़ा सवाल है। ऐसे में सवाल तो पूछा जाएगा कि कि अस्पताल में चीख पुकार, अग्निकांड का कौन जिम्मेदार ?
दीपक कुमार, सीनियर एंकर





