BIHAR NEWS : घर से निकली मिठास, विदेशों तक पहुंचा बिहार का शहद, जीविका दीदियों ने रचा इतिहास
पटना : कभी घरेलु जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली बिहार की महिलाएं आज मधुमक्खियों के सहारे आर्थिक आज़ादी की उड़ान भर रही हैं. जीविका समूह से जुड़ी दीदियों ने शहद उत्पादन को सिर्फ रोजगार नहीं,बल्कि एक मीठी क्रांति में बदल दिया है,जिसकी खुशबू अब गांवों से निकलकर देश-विदेश तक पहुंच रही है.
राज्य में करीब12हजार जीविका दीदियां मधुमक्खी पालन के जरिए हर साल10से12करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं. इस काम से महिलाएं घर बैठे हर महीने औसतन10हजार रुपये तक की आमदनी हासिल कर रही हैं,जिससे उनके परिवार की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है.
2009से शुरू हुई पहल,आज करोड़ों का कारोबार
इस सफलता की कहानी की शुरुआत वर्ष2009में मुजफ्फरपुर से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी. शुरुआती दौर में शहद उत्पादन लाखों तक सीमित था,लेकिन आज यह कारोबार राज्य के20जिलों के90प्रखंडों में फैलकर करोड़ों में पहुंच चुका है.
फिलहाल11,855महिलाएं सक्रिय रूप से शहद उत्पादन से जुड़ी हैं. कई नामी कंपनियां जीविका दीदियों से सीधे शहद की खरीद कर रही हैं,जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और महिलाओं को पूरा लाभ मिलने लगा.
बिहार का शहद,देश से विदेश तक
जीविका दीदियों के हाथों तैयार शुद्ध शहद को प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के लिए हिमाचल प्रदेश भेजा जाता है. इसके बाद यह शहद देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी निर्यात किया जा रहा है.
मधुमक्खी पालन से न केवल शहद उत्पादन बढ़ा है,बल्कि फसलों के परागण से कृषि उपज में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया सहारा
अधिकारियों के अनुसार,मधुमक्खी पालन ने ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी स्वरोजगार का रास्ता खोला है. इससे न सिर्फ महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है,बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी तेज़ी से मजबूत हो रही है.
“जीविका दीदियों के हाथों मधुमक्खी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार के लिए एक बेहतरीन माध्यम बनकर उभरा है. इससे शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों की पैदावार भी बढ़ी है. महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिला है और गांवों में खुशहाली आई है.”





