BIHAR NEWS : खेत से अंतरराष्ट्रीय पटल तक, जानिए कैसे बनीं केशर राज बिहार की पहली अंतरराष्ट्रीय बालिका तलवारबाज

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पटना/ बेगूसराय :आज बिहार की बेटियां केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं,बल्कि खेल-कूद में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं. इसी कड़ी में पूर्वी चम्पारण की होनहार बेटी केशर राज का नाम आजकल चर्चा में है,केशर का इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित होने वाली कैडेट एशियन तलवारबाजी (फेंसिंग) प्रतियोगिता 2026 के लिए भारतीय टीम में चयन होना एक ऐतिहासिक व बड़ी उपलब्धि है. यह उपलब्धि न सिर्फ केशर की व्यक्तिगत सफलता है,बल्कि बिहार में तेजी से बदलते खेल परिवेश और बढ़ते अवसरों का भी जीवंत प्रमाण है.

अंतरराष्ट्रीय तलवारबाजी प्रतियोगिता में भाग लेने वाली बिहार की पहली बालिका खिलाड़ी बनकर केशर ने राज्य का नाम गर्व से रोशन किया है. महज दसवीं कक्षां में पढ़ने वाली केशर राज का चयन 24 सदस्यीय भारतीय टीम में कैडेट (अंडर-17) राष्ट्रीय तलवारबाजी प्रतियोगिता 2025–26 में फॉयल स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ है. अब वह 18 से 27 फरवरी तक एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. इससे पहले भी वह राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वर्ण,एक रजत और तीन कांस्य पदक जीत चुकी हैं तथा वर्ष 2025 में उत्तराखंड में आयोजित एशिया कैडेट कप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.

मुख्यमंत्री खेल विकास योजना और खेलो इंडिया से मिली उड़ान

तलवारबाजी संघ के सचिव सह ट्रेनर अप्पू कुमार बताते हैं कि केशर की यह सफलता सहज नहीं रही. सात वर्ष की उम्र में फेंसिंग शुरू करने वाली केशर के पास न तो मैदान था,न प्रशिक्षक. शुरुआती दिनों में उन्हें खाली खेतों और अस्थायी स्थानों पर अभ्यास करना पड़ा. केशर की प्रतिभा को देखते हुए हमने किराए पर प्रशिक्षण के लिए इनडोर हॉल की व्यवस्था की. निरतंर प्रयास व मार्गदर्शन से केशव ने 2021 में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अंडर-12 अपना पहल कांस्य पदक अपने नाम किया. अप्पू बताते हैं कि राज्य सरकार खेल व खिलाड़ियों की उन्नति के लिए लगातार कार्य कर रही है. मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत खेल भवनों के निर्माण ने उनकी दिशा और दशा दोनों बदल दी. अभी इनके जिले में खेलो इंडिया के तहत दो सेंटर संचालित हैं,जिसमें 30 खिलाड़ी विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण ले रहे हैं.

संघर्ष की गवाह बनी मां,अब एशियन मंच पर केशर

केशर की मां कुमारी रानी,जो पेशे से शिक्षिका हैं,अपनी बेटी की खिलाड़ी के रूप में संघर्षपूर्ण यात्रा को याद करते हुए भावुक हो उठती हैं. वह बताती हैं कि किस तरह केशर ने सीमित संसाधनों के बीच तलवारबाजी की शुरुआत की और कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए आज इस मुकाम तक पहुंची है. अपनी बेटी पर गर्व जताते हुए कुमारी रानी बताती हैं कि वर्तमान में केशर महाराष्ट्र के औरंगाबाद में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं,जिसके बाद वह इंडोनेशिया में होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेने जाएंगी.

कुमारी रानी ने राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि केशर को बिहार राज्य खेल पुरस्कार के अंतर्गत दो बार 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है और उसे दो बार बिहार खेल सम्मान से भी नवाजा गया है. उनका कहना है कि यदि प्रतिभा को सही मंच और संसाधन मिलें,तो सीमित संसाधनों वाला राज्य भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर सकता है.

केशर राज की कहानी केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उन हजारों लड़कियों की उम्मीद है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं. आज जब केशर एशियन मंच पर उतरने को तैयार हैं, पूरा बिहार उनके साथ खड़ा है. उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और यह विश्वास भी जगाएगी कि मेहनत, अवसर और समर्थन के साथ बिहार की बेटियां दुनिया के किसी भी मंच पर परचम लहरा सकती हैं.