BIHAR NEWS : पटना हाईकोर्ट ने रात 9:55 के बाद डीजे और प्रेशर हॉर्न बजाने पर लगाई रोक
Patna : पटना हाईकोर्ट ने डीजे और प्रेशर हॉर्न पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने रात 9:55 के बाद डीजे, लाउडस्पीकर, मैरिज हॉल और वाहनों के प्रेशर हॉर्न को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं.
हाईकोर्ट ने कटिहार मॉडल अपनाने के लिए राज्य के सभी थाना प्रभारी को निर्देश दिया.जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ ने ध्वनि प्रदूषण और सड़कों पर वाहनों द्वारा किए जाने वाले शोर के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पूरे बिहार के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि राज्य में किसी भी हाल में रात 9:55 बजे के बाद डीजे, लाउडस्पीकर या मैरिज/बैंक्वेट हॉल में संगीत बजाने की अनुमति नहीं होगी.
इसके साथ ही दिन के समय भी लाउडस्पीकर की आवाज तय डेसिबल सीमा के भीतर ही रखनी होगी. कोर्ट ने अस्पतालों और स्कूलों के पास के क्षेत्रों को पूरी तरह'साइलेंस जोन' घोषित कर वहां बिना शोर-शराबे के गुजरने का निर्देश दिया है.
कटिहार जिले के पोठिया थाना प्रभारी द्वारा प्रेशर हॉर्न के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान और एक सप्ताह में ₹1,10,000 का जुर्माना वसूलने की सराहना करते हुए कोर्ट ने राज्य के लगभग 1500 थानों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत ऐसी ही निरंतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
कोर्ट ने बुद्धा कॉलोनी पुलिस को अल्टीमेटम और कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलेंसुनवाई के दौरान बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत हॉस्पिटो इंडिया रोड पर देर रात बाइकर्स गैंग द्वारा किए जाने वाले उपद्रव, ओवर-स्पीडिंग और बांस घाट पर तेज आवाज में बजने वाले
लाउडस्पीकर का मुद्दा प्रमुखता से उठा. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेंद्र किशोर ने बुद्धा कॉलोनी थाना प्रभारी के हलफनामा को पूरी तरह खारिज करते हुए कोर्ट को बताया कि क्षेत्र में देर रात तक लाउडस्पीकर बजते हैं और बाइकर्स के उपद्रव से स्थानीय निवासियों का रात में सोना दुश्वार हो गया है, जिससे कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा हो रही है.
इस पर राजीव रॉय ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई भी फोटो या वीडियो थाना प्रभारी के दावे को झूठा साबित करता है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इस मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी एवं वरीय अधिवक्ता अजय ने अपनी दलील में कहा कि राज्य भर में पुलिस प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई संतोषजनक है, लेकिन इस अभियान को लगातार जारी रखने की जरूरत है.
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में सख्त निर्देश भेजे. इस मामले में सरकारी वकील प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वे इस आदेश की प्रति राज्य के सभी प्रमुख अधिकारियों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों तक तुरंत पहुंचाएंगे,ताकि गाइडलाइंस का सख्ती से पालन हो सके.
कोर्ट ने सरकारी वकील प्रशांत प्रताप द्वारा दिए गए त्वरित व निष्ठावान सहयोग की विशेष सराहना करते हुए मामले की सुनवाई पूरी कर फाइल बंद कर दी.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट--





