बिहार में शराबबंदी फेल? : महिलाओं के खिलाफ अपराध में ढाई गुना बढ़ोतरी का दावा
पटना: बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शराबबंदी लागू होने के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भारी बढ़ोतरी के आंकड़ों ने सरकार की नीति पर बहस तेज कर दी है। NCAER की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले करीब 11 हजार से बढ़कर 28 हजार तक पहुंच गए हैं। यानी इन मामलों में ढाई गुना से अधिक की वृद्धि का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब बिहार सरकार लगातार शराबबंदी को सामाजिक बदलाव और अपराध नियंत्रण से जोड़कर पेश करती रही है। सरकार का तर्क रहा है कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराध में कमी आई है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
शराबबंदी के बाद शराब की अवैध बिक्री और तस्करी भी बिहार में लगातार चर्चा का विषय रही है। दूसरी ओर, नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और इससे जुड़े कारोबार को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि शराबबंदी का वास्तविक सामाजिक असर क्या रहा है और क्या इसके बावजूद अपराध पर प्रभावी नियंत्रण हो पाया है?
महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़ों में इतनी बड़ी वृद्धि सरकार के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है। अब विपक्ष शराबबंदी की समीक्षा की मांग कर सकता है।
हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह भी जरूरी है कि अपराध के मामलों में वृद्धि के पीछे रिपोर्टिंग, एफआईआर दर्ज होने की दर और कानून-व्यवस्था से जुड़े अन्य कारकों की भूमिका का भी विश्लेषण किया जाए। रिपोर्ट के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस के बीच सरकार की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।





