पेयजल संकट से जूझने लगे लोग : जानिए चतरा जिले के इस गांव की हकीकत,हाथी का दांत बना जलमीनार
चतरा: झारखंड में मार्च महीने से गर्मी ने दस्तक दे दी है, लेकिन जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत ऊपरी बेरियो गांव में सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना ग्रामीणों के लिए राहत के बजाय परेशानी का सबब बन गया है. गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए बनाए गए जलमीनार और चापानलों की स्थिति बदहाल हो गई. ऐसे में लोगों को पीने के पानी तक के लिए भटकना पड़ रहा है. ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है. लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. अगर बेरियो गांव में यही आलम रहा तो भीषण गर्मी में पानी के बिना लोगों की जान तक जा सकती है.
मरम्मती के अभाव में चापानल महीनों से बंद
ग्रामीणों के अनुसार,गांव में लगाए गए सात चापानलों में से चार खराब पड़े हैं. मरम्मती के अभाव में चापानल महीनों से बंद पड़े हुए है.जिससे बाकी बचे चापानलों पर लोगों की भीड़ लगी रहती है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी की समस्या और गंभीर होती जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना के तहत बनाया गया जलमीनार केवल दिखावा बनकर रह गया है. पाइपलाइन और जलापूर्ति की व्यवस्था ठीक से चालू नहीं होने के कारण घर-घर पानी पहुंचाने का दावा खोखला साबित हो रही है. ग्रामीणों को अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
नल-जल योजना के आस में ग्रामीण
गांव के लोगों ने कई बार संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन को समस्या से अवगत कराया,लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. ग्रामीणों ने मांग की है कि खराब चापानलों की जल्द मरम्मत कराई जाए और नल-जल योजना को सही तरीके से चालू कराया जाए, ताकि लोगों को नियमित रूप से पेयजल मिल सके. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गहरा सकता है.





