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कशिश की खबर का असर : गिरिडीह के तिसरी प्रखंड की महिला की बेबसी पर सीएम ने लिया संज्ञान, हर संभव मदद का दिया भरोसा

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गिरिडीह/रांची: न्यूज चैनल या न्यूज पोर्टल के माध्यम से जब हम किसी गरीब के हक और अधिकार के लिए सरकार से सवाल पूछते हैं तो खुद के मन में एक सवाल रहता है कि क्या सिर्फ सवाल उठाने से संबंधित व्यक्ति की समस्या समाप्त हो जाएगी या संबंधित व्यक्ति को मदद की आस में ही रहना पड़ेगा. इसी कड़ी में जबकशिश न्यूज चैनलने झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के विधानसभा क्षेत्रराजधनवारकी तिसरी प्रखंड स्थित सिंधो पंचायत के लक्ष्मीनिया टोला की सरिता देवी की खबर को प्राथमिकता से उठाया तो खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले पर संज्ञान लिया. सीएम ने अधिकारियों को निर्देश जारी कर हर संभव मदद पहुंचाने की बात अपने ट्विटर हैंडल पर साझा की.

कशिश न्यूज की खबरके बाद राज्य के मुखियाहेमंत सोरेनने अपने ट्विटर हैंडल से जिला उपायुक्त को निर्देश देते हुए लिखा कि तिसरी प्रखंड से सरिता बहन और उनके मासूम बच्चों को हर जरूरी सरकारी योजनाओं से जोड़ते हुए और बच्चों की शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए शीघ्र सूचित करें.

ज्ञात हो कि कशिश न्यूज में 26 मई को राजधनवार विधानसभा क्षेत्र के तिसरी प्रखंड स्थित सिंघो पंचायत के लक्ष्मनिया टोला की सरिता देवी के बदहाल जिंदगी पर चैनल और पोर्टल ने खबर चलाया था. जो अपने तीन मासूम बच्चों के साथ बदहाली भरी जिंदगी जीने को मजबूर है. बता दें कि पीड़ित महिला टूटी झोपड़ी, खाने का संकट और सरकारी योजनाओं से कोसों दूरी. वजह सिर्फ इतनी कि महिला के पास आधार कार्ड तक नहीं है.

झकझोर देने वाली तस्वीर : गिरिडीह की एक महिला टूटी झोपड़ी, खाने को संकट और सरकारी योजनाओं से कोसों दूर है,जानिए हकीकतhttps://klnk.in/8a82f0

सरिता देवी की जिंदगी संघर्ष की कहानी बन चुकी है. पति की मौत के बाद दूसरी शादी भी उनका सहारा नहीं बन सका. प्रताड़ना के बाद उन्हें अपने तीन बच्चों के साथ घर छोड़ना पड़ा. अब सरिता देवी मायके में टूटी-फूटी मिट्टी की झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं. घर की हालत ऐसी है कि बारिश होने पर मिट्टी ढह जाती है और कई बार खाने तक का इंतजाम नहीं हो पाता.


सरिता देवी का कहना है कि कई रातें बच्चों के साथ भूखे पेट गुजरती हैं. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उनके पास आधार कार्ड नहीं है. जिसके कारण उन्हें राशन, पेंशन और सरकारी आवास जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा.

ऐसे किसी गरीब व्यक्ति की आवाज हमारे माध्यम से सरकार तक पहुंचती है तो मन में एक संतोष होता है कि हमने जो समाज के प्रति अपना दायित्व निर्वाह किया है वह कहीं ना कहीं सफल होता दिखता है.

रांची से संवाददाता राहुल कुमार की रिपोर्ट