Bihar News : 45 दिन की ऐतिहासिक यात्रा के बाद देश का सबसे बड़ा शिवलिंग पहुंचा गोपालगंज
डेस्क:- गोपालगंज से इस वक्त आस्था, भक्ति और इतिहास से जुड़ी एक बेहद बड़ी और खास खबर सामने आ रही है। पूर्वी चंपारण के केसरिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में स्थापना के लिए देश का सबसे विशाल शिवलिंग अब गोपालगंज जिले में पहुंच चुका है। करीब45दिनों की लंबी और ऐतिहासिक यात्रा तय कर यह भव्य शिवलिंग चेन्नई से बिहार पहुंचा है। फिलहाल यह विशाल शिवलिंग उत्तर प्रदेश - बिहार सीमा पर स्थित गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र अंतर्गत एनएच-27के बलथरी चेकपोस्ट पर खड़ा है, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह कोई सामान्य यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम है। करीब ढाई सौ टन वजनी यह विशाल शिवलिंग विशेष रूप से डिजाइन किए गए भारी-भरकम ट्रक पर लादकर चेन्नई से रवाना किया गया था। करीब45दिनों की कठिन यात्रा के बाद यह ऐतिहासिक शिवलिंग अब गोपालगंज जिले में प्रवेश कर चुका है।

जैसे ही शिवलिंग के बलथरी चेकपोस्ट पर पहुंचने की सूचना फैली, आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचने लगे। शिवलिंग के पास टेंट लगाकर लगातार भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना का दौर जारी है। “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसा सौभाग्य जीवन में बार-बार नहीं मिलता, जब सड़क मार्ग से भगवान शिव का इतना विशाल स्वरूप साक्षात दर्शन दे रहा हो। प्रशासन अलर्ट मोड में इधर, शिवलिंग के सुरक्षित परिवहन को लेकर गोपालगंज जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क और एक्शन मोड में है। शिवलिंग और ट्रक का संयुक्त वजन अत्यधिक होने के कारण प्रशासन कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। शिवलिंग को आगे ले जाने से पहले पूरे रूट का तकनीकी निरीक्षण कराया जा रहा है - सड़क की मजबूती,चौड़ाई,तीखे मोड़ और खास तौर पर गंडक नदी पर बने डुमरिया पुल की भार क्षमता विशेषज्ञों की टीम पुल की संरचनात्मक मजबूती का आकलन कर रही है, ताकि आगे की यात्रा पूरी तरह सुरक्षित हो सके।

इसी क्रम में गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा और पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित स्वयं बलथरी चेकपोस्ट पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने शिवलिंग के साथ यात्रा कर रही पांच सदस्यीय तकनीकी टीम से विस्तार से बातचीत की और अब तक की यात्रा, चुनौतियों और आगे की रणनीति की जानकारी ली।

अधिकारियों ने साफ कहा कि - “जब तक पूरे रूट की विशेषज्ञों द्वारा जांच पूरी नहीं हो जाती और सभी सुरक्षा मानकों पर संतोष नहीं हो जाता, तब तक शिवलिंग को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।” श्रद्धा और सुरक्षा - दोनों सर्वोपरि प्रशासन का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और तकनीकी दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं की आस्था और जन-सुरक्षा-दोनों को ध्यान में रखते हुए हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है। पूरी तैयारी और अंतिम मंजूरी के बाद ही यह ऐतिहासिक शिवलिंग गोपालगंज से आगे बढ़कर अपने अंतिम गंतव्य-केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर-तक रवाना होगा। तो साफ है कि देश का सबसे बड़ा शिवलिंग सिर्फ पत्थर की एक आकृति नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान बन चुका है। अब पूरे देश की नजरें इस पर टिकी हैं कि कब और किस तरह यह भव्य शिवलिंग अपने गंतव्य तक पहुंचता है।
गोपालगंज से नमो नारायण मिश्रा





