BIHAR NEWS : बोल बम के जयकारों के बीच गूंजा धन्यवाद, कांवरियों ने कहा- ‘सम्राट भईया ने दिल जीत लिया
पटना : यूपी के कौशांबी के रहने वाले अजित पटेल पटना से देवघर सावन महीने में कांवर लेकर जा रहे हैं. आंखों में बाबा भोले की श्रद्धा बखूबी दिख रही है,लेकिन इस बार उनकी जुबान पर एक और नाम है,जिसकी वे प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बारम्बार धन्यवाद देते हुए कहते हैं कि बिहार में कांवरियों की मिली सुविधाओं और हम श्रद्धालुओं पर फूलों से हुई वर्षा ने उनका दिल जीत लिया है. वे आगे कहते हैं कि बिहार में आकर बाबा भोलेनाथ के लिए जल उठाना इस बार बहुत कुछ दे गया. भोलेनाथ के लिए असीम श्रद्धा और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए अनंत धन्यवाद.
- अजित पटेल,कौशांबी(यूपी)

पहले से ज्यादा सुविधा मिल रही है- यूपी के कौशांबी निवासी शीतल प्रसाद बताते हैं कि मैं पिछले 18 साल से सावन महीने में बिहार जल उठाने आता हूं. मगर यह पहली बार है कि यहां कांवरियों के सुख-सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सम्राट सरकार ने कई इंतजाम किए हैं. यहां आकर पहली बार बहुत खुशी मिली है.
- शीतल प्रसाद,कौशांबी(यूपी)

बिहार से जाने का मन ही नहीं कर रहा है- यह कहना है मध्यप्रदेश के सिंगरोली से आई लालती देवी का,जो दूसरी बार भगवान भोले के दर्शन के लिए बिहार आईं हैं. आगे कहती हैं कि सम्राट भईया ने हम श्रद्धालुओं का पूरा ध्यान रखा है. जगह-जगह पीने के लिए पानी का इंतजाम,नाश्ते की व्यवस्था,साफ-सफाई,मेडिकल कैंप एवं सुरक्षा ने कांवरियों की बाबा की नगरी की यात्रा को सुगम और आरामदायक बना दिया है. सम्राट भईया के कारण अब हम श्रद्धालु बहनें हर वर्ष बिहार आकर बाबा के दर्शन करेंगी.
-लालती दैवी,सिंगरौली,मध्य प्रदेश.
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों ओर'बोल बम'और'हर-हर महादेव'के दिव्य जयकारे गूंज रहे हैं. उत्तर प्रदेश,पश्चिम बंगाल,झारखंड जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से आए लाखों कांवड़ियों के लिए बिहार की धरती इस बार केवल एक धार्मिक मार्ग नहीं,बल्कि सेवा और आत्मीयता का केंद्र बन गई है. सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर कदम बढ़ा रहे कांवरियों के चेहरे पर थकान जरूर है,लेकिन सम्राट सरकार द्वारा किए गए इंतजामों को देखकर उनकी आंखों में कृतज्ञता और संतोष के आंसू साफ झलक रहे हैं. इस बार प्रशासनिक मुस्तैदी का ही नतीजा है कि जगह-जगह स्वच्छ पेयजल,मेडिकल कैंप और रात्रिकालीन रोशनी का ऐसा प्रबंध किया गया है,जिसने लंबी यात्रा के कष्ट को काफी हद तक हर लिया है.
बाहर से आए श्रद्धालु इस बात से अभिभूत हैं कि राज्य सरकार ने उनके आस्था के मार्ग को सुगम बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया है. सुल्तानगंज से जल उठाकर चले कांवड़ियों का कहना है कि जब सरकार श्रद्धालुओं को'देव तुल्य'मानकर सुविधाएं देती है,तो यात्रा का कष्ट अपने आप आधा रह जाता है.
सावन का यह महीना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि बिहार के आतिथ्य और संस्कृति का सशक्त उदाहरण बन गया है. जब कोई बाहरी श्रद्धालु बिहार की सीमा से होकर गुजरता है और यहां के बेहतर इंतजामों की सराहना करता है,तो यह संपूर्ण राज्य के लिए गौरव का क्षण होता है.