बिहार में डीबीटी का बड़ा असर : 328 योजनाओं के 49 हजार करोड़ सीधे खातों में पहुंचे, खत्म हुई बिचौलियों की भूमिका
पटना: बिहार में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में 328 सरकारी योजनाओं के तहत 49,622.73 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए. सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है और योजनाओं का पूरा लाभ अब सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बिहार में डीबीटी से लाभ पाने वालों की संख्या 17.37 करोड़ तक पहुंच गई है. इनमें सबसे अधिक लाभार्थी पूर्वी चंपारण जिले के हैं,जहां करीब 87 लाख लोगों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला. इसके बाद समस्तीपुर और मधुबनी जिलों में सबसे ज्यादा राशि का वितरण हुआ है.
सरकार का कहना है कि पहले योजनाओं की राशि लाभुकों तक पहुंचने में कई स्तरों पर कटौती और देरी की शिकायतें आती थीं,लेकिन डीबीटी लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ी है. अब पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंचने से भ्रष्टाचार पर भी काफी हद तक रोक लगी है.
डीबीटी व्यवस्था को केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के शुरुआती वर्षों में शुरू की गई इस प्रणाली का उद्देश्य सरकारी सहायता को बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना था. बिहार में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है.
राज्य सरकार का दावा है कि डिजिटल भुगतान और बैंकिंग नेटवर्क मजबूत होने से ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल रहा है. इससे सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ा है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--