BIG BREAKING : बिहार सरकार ने वित्तरहित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को लेकर लिया बड़ा फैसला, पढ़िए खबर में
पटना : राज्य सरकार ने वित्तरहित शिक्षकों,शिक्षकेत्तर कर्मियों एवं वित्तरहित शिक्षण संस्थानों से जुड़े मामलों पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है.माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि वित्तरहित शिक्षण संस्थानों,संस्कृत विद्यालयों एवं मदरसों के कर्मियों के वेतन भुगतान से संबंधित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा और निष्पादन के लिए पहले ही एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जा चुका है. यह समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्य कर रही है और शिक्षा विभाग के आदेश के तहत इसका गठन किया गया है.
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभागीय संकल्प संख्या-538,दिनांक19मई2009के तहत निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था लागू है. सरकार द्वारा इन संस्थानों को लोक-निजी भागीदारी के सिद्धांत पर अनुदान दिया जाता है.
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में संबंधित संस्थानों को परफॉर्मेंस बेस्ड ग्रांट के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जाती है. यह अनुदान संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या के आधार पर निर्धारित दर से दिया जाता है. साथ ही,यह भी कहा गया है कि सरकारी अनुदान उपलब्ध संसाधनों और बजटीय प्रावधानों के अनुरूप ही प्रदान किया जाता है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि वित्तरहित शिक्षकों एवं कर्मियों को राज्यकर्मी घोषित करते हुए उन्हें नियमित वेतनमान और अन्य सरकारी सुविधाएं प्रदान करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है. यह जानकारी माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा बिहार विधान परिषद के सदस्य वंशीधर ब्रजवासी के पत्र के जवाब में दी गई है. सरकार के इस जवाब को वित्तरहित शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--