बाल विवाह रोकने की अपील : बाल विवाह उन्मूलन को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार और सत्यार्थी फाउंडेशन की ओर से चला संयुक्त अभियान

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कोडरमा: जिले के सुदूरवर्ती इलाकों में बाल विवाह उन्मूलन को लेकर कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. रात्रि और संध्या चौपाल के जरिये जहां लोगों को बाल विवाह से होने वाले परेशानियों के बारे में बताया जा रहा है.वहीं बाल विवाह से जुड़ी फिल्म दिखा कर लोगों से बाल विवाह रोकने की अपील की जा रही है.

कोडरमा जिले में बाल विवाह उन्मूलन को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार और सत्यार्थी फाउंडेशन की ओर से संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत डोमचांच प्रखंड के रायडीह गांव में रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया. जहां लोगों को बाल विवाह उन्मूलन को लेकर कानूनी पहलुओं की जानकारी दी गई. वहीं जागरूकता फिल्म दिखाकर लोगों से इस मुहिम में शामिल होने की अपील भी की गई.

मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि अभियान की शुरुआत राजा राममोहन राय ने की थी. उस अभियान को निरंतर चलाने की आवश्यकता है ताकि बच्चियों की जिंदगी को सुरक्षित और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का मौका मिल सके.

बाल विवाह उन्मूलन के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान के प्रथम चरण का समापन डोमचांच प्रखंड के रायडीह गांव में किया गया. एक महीना तक चले इस अभियान के माध्यम से जिले के विभिन्न गांवों में 5 नाबालिगों का बाल विवाह होने से रोका गया और निरंतर यह प्रक्रिया जारी है.

शादियों के सीजन में सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह के मामले सामने आते रहते हैं. ऐसे में शादियों के सीजन को ध्यान में रखते हुए 1 महीने तक यह अभियान निरंतर चलाया गया और हर गांव में इसे लेकर संध्या चौपाल रात्रि चौपाल पर अन्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया. सभी गांव में आयोजित चौपाल के दौरान लोगों को बाल विवाह नहीं करने की शपथ दिलाई गई और इसे रोकने में सामाजिक भूमिका निभाने की अपील भी की गई. बच्चियों ने घर-घर जाकर लोगों को यह बताया कि बाल विवाह से न सिर्फ एक जिंदगी बर्बाद होती है बल्कि आने वाली कई पीढ़ियां भी तबाह हो जाती है.

बाल विवाह अभिशाप है और हम सभी इसके दुष्परिणामों से वाकिफ भी हैं. बावजूद इसके बाल विवाह के मामले सामने आते रहते हैं. ऐसे में इन जागरूकता कार्यक्रमों के अलावा सामाजिक चेतना से ही बाल विवाह का उन्मूलन संभव है.