Hindi News / रक्तदान शिविर एवं “ट्रैफिक जागरुकता पर विधिक सहायता आउटरीच प्रोग्राम”

एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड में दो प्रमुख कार्यक्रम : रक्तदान शिविर एवं “ट्रैफिक जागरुकता पर विधिक सहायता आउटरीच प्रोग्राम”

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रांची : एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के विज़न और मिशन के अनुरूप तथा इसके संस्थापक अध्यक्ष एवं चांसलर के आशीर्वाद सेराष्ट्रीय सेवा योजना (NSS)ने एनसीसी (NCC)और स्टूडेंट वेलफेयर डिपार्टमेंट (SWD)के सहयोग से रिम्स अस्पताल,रांची के साथ मिलकर एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड परिसर में एक संवेदनशीलता एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया. इसी दिन एमिटी लॉ स्कूल,एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड द्वारा“ट्रैफिक जागरूकता पर विधिक सहायता आउटरीच कार्यक्रम”का भी सफलतापूर्वक आयोजन किया गया.

एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के कुलपति डॉ. अशोक के. श्रीवास्तव ने दोनों कार्यक्रमों के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं.

रक्तदान शिविर का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को जीवन बचाने के इस महान कार्य के प्रति प्रेरित करना था. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण,छात्र-छात्राएं और कर्मचारीगण ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में ऊर्जा और समर्पण का विशेष वातावरण देखने को मिला. इस दौरान कुल 120 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया. रक्तदान से पूर्व प्रत्येक दाता की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की गई,जिसमें हीमोग्लोबिन स्तर और वजन की जांच शामिल थी. सभी दाताओं को भविष्य में उपयोग हेतु रक्तदान कार्ड भी प्रदान किए गए.

रक्तदाताओं को जलपान,प्रमाणपत्र तथा मानवता की इस सेवा के लिए स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया. इस अवसर पर डॉ. अभिषेक त्रिपाठी (डीन,मैनेजमेंट एंड एलाइड प्रोग्राम्स),डॉ. प्रभात कुमार त्रिपाठी (एसोसिएट डीन, SWD),एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड सहित अन्य शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और उन्होंने रक्तदान कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई.

दूसरा प्रमुख कार्यक्रम“ट्रैफिक जागरूकता पर विधिक सहायता आउटरीच कार्यक्रम”का उद्देश्य आम जनता को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन के महत्व के बारे में जागरूक करना था. इस कार्यक्रम को लोगों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली,जिसने सुरक्षित सड़कों और जागरूक समाज के निर्माण की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित किया.

इस पहल की एक प्रमुख विशेषता छात्रों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित पोस्टर और दृश्य सामग्री थी,जिन्होंने यातायात नियमों और सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया.

स्वयंसेवकों ने ऑटो-रिक्शा और बस चालकों के साथ संवाद स्थापित कर एक-एक करके उन्हें यातायात नियमों,यात्री सुरक्षा और वैध दस्तावेजों के कानूनी महत्व के बारे में जानकारी दी. इन संवादों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और परिवहन संचालकों के बीच की दूरी को कम करते हुए सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया.

इस पहल की स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा सराहना की गई. बिरसा चौक पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने छात्रों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी और रचनात्मक पहल सार्वजनिक अनुशासन और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देती है. यह कार्यक्रम क्लिनिकल लीगल एजुकेशन और फील्ड आधारित एडवोकेसी के महत्व को भी रेखांकित करता है, जो सामाजिक रूप से जागरूक विधि पेशेवरों के निर्माण में सहायक है.