स्वास्थ्य व्यवस्था की उदासीनता : सरायकेला में नाजीर की मौत के बाद नहीं मिली एंबुलेंस,समाजसेवी के निजी एम्बुलेंस से मिला मदद

Edited By:  |
swasthya vyawastha ki udasinta

सरायकेला: खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुली है. प्रखंड में पदस्थापित नाजीर तापस सरकार की आकस्मिकमौत के बाद सरकारी एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं हो सकी. स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.बताया जा रहा है कि नाजीर तापस एक सरकारी कर्मी थे, बुधवार सुबह सरकारी काम से वे सरायकेला जा रहे थे. इस दौरान ईचागढ़ थाना क्षेत्र के बाकलतोड़िया के पास वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े.राहगीरों की सूचना पर उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई, लेकिन गंभीर स्थिति में भी उन्हें सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी. थक हार कर समाजसेवी हरे लाल महतो के निजी एम्बुलेंस की सहायता से उन्हें पातकुम स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ईचागढ़ लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया.

सूत्रों के अनुसार, किसी अधिकारी ने आजसू प्रखंड अध्यक्ष अरुण महतो से संपर्क कर मदद मांगी. जिसके बाद अरुण महतो ने तत्परता दिखाते हुए हरे लाल महतो का निजी एम्बुलेंस भेजवाया. अस्पताल ले जाने से लेकर पोस्टमार्टम तक की पूरी प्रक्रिया निजी एम्बुलेंस की मदद से हुई. इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों और कर्मियों में आक्रोश है.

तापस सरकार मूल रूप से पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत कालिकापुर के निवासी थे. वे पूर्व में सरायकेला अनुमंडल कार्यालय में भी पदस्थापित रह चुके हैं. उनके निधन से प्रखंड कार्यालय और क्षेत्र में शोक की लहर है.

वहीं, लोगों का कहना है कि जब एक सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस पूरे मामले को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी, स्थानीय विधायक सविता महतो और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाया जा रहा.

स्थानीय लोगों ने इसे सरकारी व्यवस्था की विफलता बताते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि आपात स्थिति में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होना गंभीर लापरवाही है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए.