JHARKHAND NEWS : बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान: पाकुड़ में घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों पर होगी उच्च स्तरीय जांच
दो दिवसीय दौरे पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी आज पाकुड़ के सर्किट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए एस आई आर के विषय में जानकारी दी एस आई आर के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि संथाल परगना पश्चिम बंगाल से सटे हुए जिले हैं जिसके कारण बांग्लादेशी पहले बंगाल में आए उसके बाद पाकुड़ साहिबगंज एवं संथाल के अन्य जिले में धीरे-धीरे गांव में फिर शहर में बस गए उसके बाद फर्जी आधार एवं फर्जी वंशावली बनाकर वोटर लिस्ट में एवं आधार कार्ड में नाम दर्ज कराया जिसको लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को मेरे द्वारा शिकायत भी की गई थी शिकायत के आलोक में जिला प्रशासन को मुख्य चुनाव आयुक्त के द्वारा पत्र लिखकर जांच करने का निर्देश दिया गया था जिला प्रशासन की ओर से पत्र के आलोक में तीन सदस्यी कमेटी का गठन किया गया लेकिन उस कमेटी के द्वारा आनन फानन में जांच कर लीपा पोती की गई एवं सही से जांच न कर भेज दिया गया पुनः मेरे द्वारा ठीक ढंग से जांच करने की शिकायत की गई है और अगर ये लोग समझते हैं कि हम फर्जी तरीके से आधार एवं वोटर कार्ड में नाम चडा़कर बच जाएंगे तो यह नामुमकिन है आने वाला समय में केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा सेवानिवृत न्यायाधीशों एवं पदाधिकारी की जांच कमेटी बनाई गई है जिसके तहत झारखंड में आदिवासियों का जमीन जिन लोगों के द्वारा गलत तरीके से हड़प कर घर बनाया गया है उसके आधार पर उसकी जांच होगी एवं जो लोग अवैध तरीके से रह रहे हैं उसे बाहर निकाला जाएगा.
इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में पाकुड़ विधानसभा की कुल जनसंख्या 7 लाख 2000 थी जिसमें आदिवासी पहाड़िया की संख्या 3 लाख 12 हजार 838 थी यानी कुल 46 . 64% वहीं मुस्लिम की संख्या 2 लाख 17 हजार 962 यानी की 32.74% वही 2011 में कुल जनसंख्या 9 लाख 422 थी जिसमें आदिवासी की संख्या 3 लाख 79 हजार 54 थी यानी कुल 42% यानी 5% की गिरावट आई है वही मुस्लिम की जनसंख्या 3 लाख 22 हजार 633 थीं 3 5.87% यानी 3% की बढ़ोतरी हुई है इससे साफ होता है आदिवासी की जनसंख्या घट रही है और मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ रही है यह कैसे संभव है इसलिए सरकार को चाहिए कि सघन रूप से जांच की जाए एवं जो बाहरी हैं जो लोग बांग्लादेशी हैं उसे खोज कर निकाल कर बाहर किया जाए। और अभी सरकार नहीं चाहती तो आने वाले समय में आदिवासियों की संख्या शून्य हो जाएगी