JHARKHAND NEWS : झारखंड सरकार का बड़ा कदम: सभी सरकारी बिलों और वेतन भुगतानों के लिए डिजिटल सिग्नेचर अनिवार्य
अगर आप झारखंड में सरकारी कर्मचारी हैं या सरकारी वित्तीय व्यवस्था से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद खास है। अब झारखंड में सरकारी भुगतान की पूरी व्यवस्था पेपरलेस यानी कागज़मुक्त होने जा रही है। वित्त विभाग के नए आदेश के मुताबिक, राज्य में अब सभी प्रकार के बिलों का भुगतान सिर्फ और सिर्फ ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए ही किया जाएगा।
वित्त विभाग की संयुक्त सचिव ज्योति कुमारी झा ने इस संबंध में एक औपचारिक पत्र जारी कर सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों यानी DDOs को आवश्यक कार्रवाई जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। आइए जानते हैं कि इस बदलाव के बाद किन-किन भुगतानों पर असर पड़ेगा:
वेतन बिल: कर्मचारियों के हर महीने के वेतन का भुगतान अब पूरी तरह डिजिटल होगा।
आकस्मिक व्यय और भत्ते: आकस्मिक खर्चों के बिल और यात्रा भत्ता यानी TA बिल अब कागजों पर नहीं, डिजिटल माध्यम से पास होंगे।
अग्रिम भुगतान: हाउस बिल्डिंग एडवांस और मोटर कार एडवांस जैसे विभिन्न अग्रिम (Advances) भी इसी नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे।
यानी साफ है कि अब इन तमाम भुगतानों के लिए पारंपरिक कागजी हस्ताक्षर वाली प्रक्रिया हमेशा के लिए समाप्त हो रही है।
सरकार का यह कदम राज्य में डिजिटल वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। वैसे आपको बता दें कि आईएफएमएस (IFMS) के तहत ई-वाउचर प्रणाली का दायरा अब तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
इस पूरी व्यवस्था के पैमाने को समझें तो, झारखंड सरकार हर महीने औसतन करीब 3,205 करोड़ रुपये का व्यय विभिन्न मदों में करती है, जो सालाना आधार पर लगभग 38,456 करोड़ रुपये बैठता है:
वेतन मद: राजस्व प्राप्ति का करीब 16 प्रतिशत यानी 1,800 से 2,000 करोड़ रुपये हर महीने।
पेंशन मद: लगभग 7 प्रतिशत यानी 800 से 900 करोड़ रुपये प्रतिमाह।
ब्याज भुगतान व अन्य: करीब 5 प्रतिशत यानी 500 से 600 करोड़ रुपये प्रतिमाह।
इस पूरी ई-वाउचर प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी विभागों में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को नामित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के लिए विभागीय स्तर पर 'मेकर' और 'चेकर' भी तय किए जाएंगे, जिनकी जानकारी वित्त विभाग को सौंपनी होगी।
इस आदेश की प्रतियां प्रधान महालेखाकार और पीएमयू कोषागार को भी भेज दी गई हैं। कुल मिलाकर कहें तो, झारखंड सरकार का यह डिजिटल कदम वित्तीय पारदर्शिता और कामकाज में तेजी लाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सराहनीय कदम है।