झारखंड बीजेपी ने सरकार को घेरा : राज्य में बढ़ती महिला और बच्चों तस्करी पर सरकार की चुप्पी शर्मनाक-राफिया नाज
रांची: झारखंड में लगातार बढ़ रही महिला एवं बच्चियों की तस्करी, गुमशुदगी और महिला सुरक्षा के मुद्दें पर BJP ने राज्य सरकार को घेरते हुए हमला बोला है. प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने कहा कि झारखंड आज मानव तस्करों का सुरक्षित अड्डा बनता जा रहा है, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है. राफिया नाज ने कहा कि महिला सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित होकर रह गया है, जबकि जमीनी स्थिति बेहद भयावह है. गांवों और गरीब परिवारों की बेटियों को नौकरी, शादी और बेहतर भविष्य का झांसा देकर दूसरे राज्यों और यहां तक कि विदेशों में भेजा जा रहा है.
राज्य कई लापता बच्चियां गायब वापस नहीं लौटीं
उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि कई बच्चियां और महिलाएं गायब होने के बाद कभी वापस तक नहीं लौटतीं. NCRB और सामाजिक संगठनों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड लंबे समय से महिला एवं बाल तस्करी से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है. राफिया नाज ने कहा कि साहिबगंज, पाकुड़, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम जैसे आर्थिक रूप से कमजोर जिलों से बड़ी संख्या में बच्चियों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं. कई नाबालिग लड़कियों को घरेलू काम, जबरन मजदूरी और देह व्यापार तक में धकेले जाने की शिकायतें सामने आई हैं.
“मिसिंग गर्ल्स” मामलों पर राज्यपाल कार्यालय को मांगनी पड़ी रिपोर्ट
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अप्रैल 2026 में राज्यपाल कार्यालय को खुद “मिसिंग गर्ल्स”मामलों पर डीजीपी से जिला-वार रिपोर्ट मांगनी पड़ी थी. यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर कानून-व्यवस्था कितनी कमजोर हो चुकी है. उन्होंने दावा किया है कि फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड राज्य महिला आयोग में 4,014 से अधिक मामले लंबित हैं. वहीं, पिछले 13 महीनों में केवल कोल्हान प्रमंडल से 106 से अधिक युवतियां और नाबालिग लड़कियां लापता हुई हैं. प्रवक्ता ने कहा कि NCRB और राज्य पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में झारखंड से लगभग 3,000 से अधिक महिलाएं और नाबालिग लड़कियां लापता दर्ज की गई थीं, जबकि 2023 और 2024 में भी यह संख्या लगातार बढ़ती रही.
महिला आयोग का गठन नहीं होना सरकार की विफलता
उन्होंने कहा कि राज्य में वर्षों से महिला आयोग का गठन नहीं होना और बाल संरक्षण तंत्र का निष्क्रिय रहना यह साबित करता है कि सरकार महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. बीजेपी प्रवक्ता राफिया नाज़ ने कहा कि राजधानी रांची के कोकर क्षेत्र से डेढ़ साल की मासूम बच्ची के गायब होने के एक सप्ताह बाद भी पुलिस उसे बरामद नहीं कर पाई है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी में एक मासूम सुरक्षित नहीं है, तो गांवों की बेटियों की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
“सिर्फ पोस्टर और सोशल मीडिया अपील तक सीमित है तंत्र”
बीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र केवल “लापता” पोस्टर और सोशल मीडिया अपील तक सीमित होकर रह गया है, लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर गायब हुई बच्चियां मिल क्यों नहीं रहीं. उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन 181 और अन्य सुरक्षा तंत्र भी जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हैं. पीड़ित परिवारों को थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और समय पर कार्रवाई नहीं होती.
उच्चस्तरीय जांच और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट मजबूत करने की मांग
अंत में राफिया नाज ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सरकार की नैतिक विफलता है. उन्होंने मांग की कि महिला तस्करी और गुमशुदगी के मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, हर जिले में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को मजबूत किया जाए और महिला सुरक्षा तंत्र को जवाबदेह बनाया जाए.