फरक्का जल संधि पर JDU का विरोध तेज : संजय झा बोले- बिहार के हितों का आकलन कर ही हो नवीनीकरण का फैसला
पटना: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर वर्ष1996में हुई फरक्का जल संधि अब चर्चा के केंद्र में है. संधि की अवधि12दिसंबर2026को समाप्त होने वाली है. इसके नवीनीकरण को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस तेज हो गई है. जनता दल यूनाइटेड (JDU)ने मौजूदा स्वरूप में संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है.
JDUके राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने6अगस्त को राज्यसभा में फरक्का जल संधि का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि संधि को मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ाने से पहले बिहार समेत गंगा बेसिन के राज्यों की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि बिहार के हितों को ध्यान में रखकर ही भविष्य की जल बंटवारे की व्यवस्था तय होनी चाहिए.
फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी पर बनाया गया है. इसका उद्देश्य हुगली नदी में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखना और कोलकाता बंदरगाह की जरूरतों को पूरा करना रहा है. वर्ष1996की संधि के तहत गंगा के उपलब्ध जल प्रवाह के आधार पर भारत और बांग्लादेश के बीच पानी के बंटवारे की व्यवस्था निर्धारित की गई है.
संधि में कम,मध्यम और अधिक जल प्रवाह की स्थिति के अनुसार दोनों देशों के लिए अलग-अलग प्रावधान है. अब संधि की अवधि समाप्त होने से पहले इसके भविष्य को लेकर बातचीत और राजनीतिक मंथन शुरू हो गया है.
JDU का कहना है कि बिहार सहित पूरे गंगा बेसिन की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों का आकलन जरूरी है. इसके बाद ही नई व्यवस्था या संधि के नवीनीकरण पर निर्णय लिया जाना चाहिए.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--