BIHAR NEWS : अब बिहार के किसान मछली पालन के साथ उगाएंगे मोती, योजना को मिली अनुमति
पटना : अब राज्य के किसान डेयरी,मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के प्रयास से मोती पालन कर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे. इस वर्ष,यानी वर्ष2026-27में,मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत मछली के साथ मोती और झींगा पालन को बढ़ावा दिया जाएगा. माना जा रहा है कि इस पहल से किसान एक साथ कई प्रकार की जलीय कृषि कर न सिर्फ अपनी आय बढ़ा सकते हैं,बल्कि यह जलवायु अनुकूल खेती के लिए भी कारगर साबित हो सकता है.
वर्ष2026-27में100यूनिट,यानी करीब50एकड़ में मोती पालन का लक्ष्य है. एक अनुमान के मुताबिक,इससे1.2लाख मोती का उत्पादन हो सकेगा. लाभुकों के चयन के लिए विभाग मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करेगा.
इस योजना के तहत मोती पालकों को60प्रतिशत का भारी अनुदान दिया जाएगा. समय की मांग और अधिक मुनाफे के लिए मछली पालन के साथ-साथ मोती पालन में किसानों की रुचि बढ़ी है. इस मांग को देखते हुए राज्य सरकार इस वर्ष उपलब्ध जल निकायों और तालाबों में मोती पालन की योजना शुरू करने जा रही है.
बिहार में मोती पालन की है असीम संभावनाएं
भारत तथा अन्य देशों में मोती की मांग लगातार बढ़ रही है. भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी अधिक मात्रा में संवर्धित,यानी कल्चर्ड मोती का आयात करता है.
वैज्ञानिकों ने पाया है कि बिहार में इसकी अपार संभावनाएं हैं. हाल के वर्षों में मीठे पानी का मोती संवर्धन कुल मोती उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा रहा है. मीठे पानी के मोती संवर्धन में समुद्री मोती संवर्धन की तुलना में कई फायदे हैं,जैसे प्रचुर मात्रा में खेती योग्य क्षेत्र उपलब्ध होना और शिकारी जीवों की कमी आदि. इस कारण यह अधिक किफायती है.
भारत,चीन,जापान,कोरिया,मलेशिया और म्यांमार जैसे कई एशियाई देशों में बड़े पैमाने पर मीठे पानी के मोती संवर्धन को विकसित कर अपनाया गया है और मोतियों की वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए नए अनुसंधान किए जा रहे हैं. केंद्रीय मीठा जल जीव पालन संस्थान (सीआईएफए),भुवनेश्वर ने देश भर में फैले मीठे जल निकायों में मीठे जल की मोती पालन या संवर्धन की प्रौद्योगिकी विकसित की है. साथ ही,मीठे पानी में मोती की खेती और उत्पादन पर शोध एवं तकनीक भी विकसित की गई है.