BIHAR NEWS : माले का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न, कुणाल फिर बने राज्य सचिव
दरभंगा :भाकपा-माले का 12वां बिहार राज्य सम्मेलन तीन दिनों की व्यापक बहस,राजनीतिक चर्चा और भविष्य की कार्ययोजना तय करने के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हो गया. सम्मेलन में पार्टी के कामकाज की रिपोर्ट पर प्रतिनिधियों ने विस्तार से चर्चा की और राज्य की राजनीतिक परिस्थिति,संगठन विस्तार,जनआंदोलनों तथा आगामी संघर्षों को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे.
सम्मेलन को संबोधित करते हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज देश और बिहार दोनों एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं. भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों,संविधान और गरीबों के जीवन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन बुलडोज़र राज,दमनकारी नीतियों और लोकतंत्र विरोधी राजनीति के खिलाफ जनता की आवाज को और मजबूत करने का संकल्प है.
उन्होंने कहा कि पार्टी गांव-गांव और मोहल्लों तक पहुंचकर गरीबों,मजदूरों,किसानों,नौजवानों,महिलाओं और छात्रों के सवालों पर संघर्ष को तेज करेगी. उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि नई ऊर्जा और एकजुटता के साथ पार्टी संगठन को मजबूत बनाते हुए भाजपा के बुलडोज़र शासन और सांप्रदायिक राजनीति का मुकाबला किया जाए.
सम्मेलन के पर्यवेक्षक वी शंकर ने कहा कि बिहार हमेशा देश की राजनीति को दिशा देने वाला राज्य रहा है. उन्होंने कहा कि चुनावी परिणाम चाहे जो रहे हों,बिहार की जनता संघर्षशील और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने वाली जनता है.
उन्होंने कहा कि पूरे देश की प्रगतिशील ताकतें उम्मीद भरी निगाहों से बिहार को देख रही हैं. अपने संबोधन में उन्होंने तमिलनाडु में डीएमके की हार का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को और व्यापक एकता बनानी होगी.
सम्मेलन में ध्वनिमत से पार्टी के कामकाज की रिपोर्ट पारित की गई. इसके बाद 107 सदस्यों वाली नई राज्य कमिटी का चुनाव संपन्न हुआ. नई राज्य कमिटी ने सर्वसम्मति से कॉमरेड कुणाल को एक बार फिर राज्य सचिव चुना.
नई राज्य कमिटी में महिलाओं,युवाओं और आंदोलनकारी साथियों को विशेष महत्व दिया गया है. इस बार 27 नए चेहरों को राज्य कमिटी में शामिल किया गया है,जबकि 13 साथियों को आमंत्रित सदस्य बनाया गया है. पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठन के विस्तार और नई पीढ़ी को नेतृत्व में आगे लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.
सम्मेलन में आगामी दौर के संघर्षों और अभियानों को लेकर 10 सूत्री कार्यभार भी पारित किए गए.
सम्मेलन से 20 मई को ग्रामीण मजदूरों की हड़ताल को व्यापक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया गया. साथ ही उसी दिन से बिहार के 10 लाख गरीब परिवारों के बीच पहुंचकर जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया गया.
सम्मेलन में पारित प्रमुख प्रस्तावों में महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने,जाति आधारित जनगणना कराने,समता आंदोलन का विस्तार करने तथा बुलडोज़र हमलों के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा कराना शामिल है. सम्मेलन में बिहार के शिक्षा मंत्री के हालिया बयान की कड़ी निंदा करते हुए उसे शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया.
सम्मेलन का समापन इंकलाबी नारों और लोकतंत्र, संविधान तथा जनाधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ.