BIHAR NEWS : खनन विभाग में तैनात किए जाएंगे 1 हजार खनन सिपाही – मंत्री प्रमोद कुमार
पटना : बिहार अवैध खनन की रोकथाम के लिए खान एवं भूतत्व विभाग के पास जल्द ही अपने सिपाही होंगे. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की तर्ज पर खनन सिपाही की भर्ती की जाएगी. फिलहाल एक हजार खनन सिपाही की भर्ती की जाएगी. इससे संबंधित प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है. इसके बाद इसे अमलीजामा पहनाने के लिए संबंधित भर्ती एजेंसी को भेजा जाएगा. ये बातें खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार ने विकास भवन सचिवालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही. उन्होंने कहा कि इस पहल से खनन में पारदर्शिता आएगी. अभी छापेमारी करने में स्थानीय पुलिस का सहयोग लेना पड़ता है. इससे उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. खनन महकमा के पास अपने सिपाही होने से छापेमारी और अवैध खनन में जुड़े वाहनों को जब्त करने में आसानी होगी. इससे विधि-व्यवस्था संभाल रही स्थानीय पुलिस का काम हल्का होगा. खनन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी. इन खनन सिपाहियों का समुचित तरीके से प्रशिक्षण कराया जाएगा और इससे जुड़े मानकों का भी निर्धारण किया जाएगा.

मंत्री ने राज्य में पत्थर खनन को एक बड़ा उद्योग बताते हुए कहा कि नवादा जिले में पत्थर खनन के आठ खनन पट्टों के लिए निविदा प्रकाशित कर दी गई है. शेष जिलों औरंगाबाद, गया, शेखपुरा तथा बांका में पत्थर खनन पट्टों के लिए 15 अगस्त तक निविदाएं जारी कर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि इन पत्थर खनन इकाइयों के संचालन से राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. साथ ही इससे सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी. खनन पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी तथा पट्टे पांच वर्ष की अवधि के लिए दिए जाएंगे. मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य के गया और रोहतास जिलों में मैग्नेटाइट, वैनेडियम और ग्लॉकोनाइट खनिज ब्लॉकों की नीलामी की जा रही है. इस संबंध में 17 अगस्त को पटना में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में एक रोड शो आयोजित किया जाएगा.
इस अवसर पर विभाग के सचिव-सह-खान आयुक्त अवनीश कुमार सिंह तथा खान निदेशक मनेश कुमार मीणा भी उपस्थित थे.
शुरुआती चार महीनों में राजस्व संग्रह में 39 प्रतिशत की हुई वृद्धि
चालू वित्तीय वर्ष के दौरान शुरुआती चार महीनों के दौरान राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में 790.23 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया.जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह राशि 590.12 करोड़ रुपये थी.उन्होंने कहा कि विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि (जुलाई तक) की तुलना में 221.11 करोड़ रुपये अर्थात 38.85 प्रतिशत अधिक राजस्व संग्रह किया है.यह वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व प्राप्ति में असाधारण वृद्धि का संकेत है.सामान्यतः विभाग के राजस्व संग्रह में प्रतिवर्ष लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जाती है.उन्होंने कहा कि विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 5,000 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है.उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हम निश्चित रूप से इस लक्ष्य को प्राप्त करेंगे.
आईएसटीपी लागू होने के दो माह बाद भी विभाग को मिले 45 करोड़
खान एवं भूतत्व मंत्री ने कहा कि 10 जून से लागू किए गए इंटर-स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) प्रणाली से राज्य को उल्लेखनीय लाभ हुआ है.इसके लागू होने के बाद लगभग दो माह से भी कम समय में विभाग ने 45 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है.उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों से बिहार में प्रवेश करने वाले लघु खनिजों से लदे वाहनों की डिजिटल निगरानी के उद्देश्य से 10 जून को आईएसटीपी पोर्टल शुरू किया गया था.इसके शुरू होने के बाद से राज्य को प्रत्येक सप्ताह औसतन 6 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है.चालू वित्तीय वर्ष में केवल आईएसटीपी प्रणाली से ही राज्य को 250 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होने की उम्मीद है.उन्होंने बताया कि आईएसटीपी व्यवस्था अन्य राज्यों में पहले से लागू थी,लेकिन बिहार में इसके लागू नहीं होने के कारण राज्य को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा था.
उन्होंने बताया कि अब तक 22 हजार 203 वाहनों का पंजीकरण आईएसटीपी पोर्टल पर किया जा चुका है.प्रतिदिन लगभग 4 हजार वाहन अन्य राज्यों से बिहार में प्रवेश कर रहे हैं.इनमें झारखंड,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,पश्चिम बंगाल,छत्तीसगढ़,हरियाणा,राजस्थान और उत्तराखंड से आने वाले वाहन शामिल हैं.
राज्य में प्रवेश करने वाले खनिज वाहनों पर जीपीएस अनिवार्य
उन्होंने कहा कि राज्य के बाहर से लघु खनिज लेकर आने वाले सभी वाहनों में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगाने की व्यवस्था की जा रही है.इस पहल का उद्देश्य लघु खनिजों के परिवहन को अधिक पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाना है,ताकि ऐसे वाहनों की रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित की जा सके.उन्होंने कहा कि वाहनों में जीपीएस उपकरण लगवाने की जिम्मेदारी वाहन मालिकों की होगी.इसके लिए उन्हें एक से डेढ़ महीने का समय दिया जाएगा.निर्धारित अवधि के भीतर जीपीएस नहीं लगाने पर संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
जुलाई में की गई 16 हजार 401 छापेमारी
प्रमोद कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जुलाई तक अवैध खनन एवं अवैध परिवहन के विरुद्ध 16,401 सघन छापेमारी की गई.इन अभियानों में 198 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया,2,058 वाहनों को जब्त किया गया तथा 31.24 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया.चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक 16,861 छापेमारी अभियान चलाए जा चुके हैं.इस दौरान 278 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया,2,497 वाहनों को जब्त किया गया तथा 32.64 करोड़ रुपये की दंड राशि वसूल की गई.
गाद (सिल्ट) प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर तैयार होंगे सर्वेक्षण प्रतिवेदन
राज्य की विभिन्न नदियों में जमा गाद के प्रभावी प्रबंधन के लिए संबंधित जिलों को जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (डीएसआर) तैयार करने का निर्देश दिया गया है. मंत्री ने बताया कि डीएसआर को मंजूरी मिलने के बाद जिलाधिकारी (कलेक्टर) के माध्यम से नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस पहल से सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, विभिन्न विभागों की परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी तथा राज्य की नदियों में अत्यधिक गाद जमाव की समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी.