BIHAR NEWS : कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही 'कृषि अवसंरचना कोष' योजना, राज्य में अब तक 2045 परियोजनाएं स्वीकृत - कृषि मंत्री विजय सिन्हा
पटना : बिहार केकृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने'कृषि अवसंरचना कोष' (एआईएफ) योजना की प्रगति की सराहना करते हुए कहा है कि यह योजना राज्य के कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है. कृषि अवसंरचना कोष एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश और राज्य में कृषि अवसंरचना में सुधार के लिए मध्यम से दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण सुविधा जुटाना है. इस योजना के माध्यम से फसलों की कटाई के बाद उनके बेहतर प्रबंधन और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है.
कृषि मंत्री ने बताया कि दिनांक04नवंबर2025तक बिहार में इस योजना के अंतर्गत कुल2045परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनके लिए कुल1650.37करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है.
उन्होंने बताया कि बिहार में सबसे बड़ा निवेश भंडारण क्षमता बढ़ाने में किया गया है, जिसके तहत834गोदाम परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं. इसके अलावा, खेती और कटाई के मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए591परियोजनाएं जारी हैं.
मंत्री ने कहा कि फसलों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए राज्य में315प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं. छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध कराने के लिए196कस्टम हायरिंग सेंटर भी बनाए गए हैं.
इसके अलावा इस योजना में ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म, साइलो, पैक-हाउस, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, पकने वाले कक्ष (Ripening Chambers), जैविक इनपुट उत्पादन, और स्मार्ट एवं सटीक कृषि (Smart and Precision Farming) जैसी विभिन्न आधुनिक अवसंरचनाएं शामिल हैं.
कृषि मंत्री ने राज्य के किसानों, उद्यमियों और युवाओं से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है. उन्होंने योजना के प्रमुख लाभों को रेखांकित किया:
* इस योजना के तहत2करोड़ रुपये तक के सभी ऋणों पर3%प्रति वर्ष की दर से ब्याज में छूट दी जाती है, जो अधिकतम7वर्षों के लिए उपलब्ध है. एक आवेदक विभिन्न स्थानों पर अधिकतम25परियोजनाएं स्थापित कर सकता है.
*2करोड़ रुपए तक के ऋण के लिए'सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि ट्रस्ट' (CGTMSE) योजना के तहत क्रेडिट गारंटी कवरेज मिलता है. इसके लिए फीस का भुगतान भी सरकार द्वारा अधिकतम7वर्षों तक किया जाता है, जिससे आवेदकों को किसी कोलैटरल/गारंटी की आवश्यकता नहीं होती.
* इस योजना के तहत निवेशकों को कुल परियोजना लागत का केवल कम से कम10%हिस्सा ही खुद से अंशदान (कंट्रीब्यूशन) करना अनिवार्य है.
विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि इस योजना का दायरा बहुत व्यापक है. इसके तहत व्यक्तिगत किसान, निजी संस्थाएं, स्टार्टअप, एफपीओ (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), संयुक्त देयता समूह (JLG), पैक्स (PACS), मिल मालिक, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, व्यापारी, भंडारण प्रदाता, स्मार्ट खेती सेवा प्रदाता और स्थानीय निकाय या पीपीपी परियोजनाएं लाभ लेने के लिए पूरी तरह पात्र हैं.
आवेदन की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बताते हुए उन्होंने कहा कि इच्छुक लाभार्थी योजना के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल *www.agriinfra.dac.gov.in* पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं, अपना आवेदन भर सकते हैं और अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा कर सकते हैं.
कृषि मंत्री ने दोहराया कि बिहार सरकार राज्य के किसानों की समृद्धि और कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और 'कृषि अवसंरचना कोष' इसमें एक मील का पत्थर साबित हो रहा है.