बिहार में 'केयर इकोनॉमी' को मिलेगी मजबूती : 1050 नए आंगनबाड़ी केंद्र होंगे विकसित, जेरोधा और वेदांता के साथ हुआ एमओयू
पटना: राज्य में महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास तथा'केयर इकोनॉमी'को सुदृढ़ करने हेतु दिनांक 17.07.2026 को महिला एवं बाल विकास निगम और समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान,आईसीडीएस निदेशालय ने वेदांता लिमिटेड और जेरोधा ब्रोकिंग लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत राज्य में 1050 नए और आधुनिक आंगनबाड़ी केंद्र विकसित किए जाएंगे,जो निजी क्षेत्र की भागीदारी से बच्चों और महिलाओं को बेहतर पोषण तथा देखभाल सेवाएं प्रदान करेंगे.
इस अनूठी पहल के तहत,वेदांता ग्रुप लिमिटेड राज्य भर में 1000 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर'नंदघर'के रूप में विकसित करेगा. वहीं,जेरोधा ब्रोकिंग लिमिटेड दरभंगा जिले के 50 आंगनबाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण करेगा. समाज कल्याण विभाग की मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि यह सहयोग आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए न केवल उत्कृष्ट आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करेगा,बल्कि प्रारंभिक बाल देखभाल एवं पोषण सेवाओं को भी एक नई दिशा देगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में देखभाल सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ने वाली है,इसलिए इस क्षेत्र को नीतिगत स्वरूप देकर औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने समाज की सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है,बल्कि इसमें पुरुषों की भी समान भागीदारी होनी चाहिए. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पंचायती राज में 50 प्रतिशत आरक्षण जैसी ऐतिहासिक पहल की गई थी,क्योंकि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं,तो पूरा परिवार और समाज विकास की ओर अग्रसर होता है. उन्होंने निजी क्षेत्र का भी आह्वान किया कि वे केयर वर्क को सम्मान और संस्थागत पहचान दिलाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं.
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा ने केयर इकोनॉमी में बालिकाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देने की बात कही. समाज में पुरुषों की समान जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने एक बेहद अहम सुझाव दिया कि बच्चों की देखभाल के लिए पुरुषों के लिए भी'चाइल्ड केयर लीव'की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देश भर से आए प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने बिहार के केयर इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए अपने बहुमूल्य विचार साझा किए. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने केयर वर्कफोर्स के कौशल विकास,मानकों और कम्युनिटी-बेस्ड एल्डरकेयर को एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया. वहीं, IGIMS, Patnaऔर असम स्थितLGBRIMHके प्रतिनिधियों ने बाल देखभाल,दिव्यांगता सहायता और केयर प्रोवाइडर्स की पेशेवर दक्षता को मान्यता देने से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए.UN WomenऔरUNFPA, Indiaने केयर इकोनॉमी से जुड़ी वैश्विक एवं राष्ट्रीय सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण बढ़ती देखभाल सेवाओं की मांग पर विस्तार से प्रकाश डाला. इसके अतिरिक्त,अवसर एचआर सर्विसेज,यूनिसेफ,डेलॉयट और हेल्पएज इंडिया जैसी प्रमुख संस्थाओं के विशेषज्ञों ने केयरगिविंग को एक बड़े और सम्मानजनक रोजगार मॉडल में बदलने के साथ-साथ बिहार के लिए एक मजबूत नीतिगत रोडमैप तैयार करने की दिशा में अपने व्यावहारिक और तकनीकी सुझाव दिए.
इस महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास निगम की प्रबंध निदेशक डॉ. प्रीति के स्वागत भाषण से हुआ. तदुपरांत,समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एच.आर. श्रीनिवास ने कार्यशाला के उद्देश्यों और केयर इकोनॉमी से जुड़े प्रमुख संस्थागत और नीतिगत बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला. अंत में,कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.
पटना से अंकिता की रिपोर्ट--