बंगला सरकार का फिर मुद्दा क्यों तकरार का ? : राबड़ी देवी फोर्स बुलावा कर सरकारी बंगला खाली करवाने की क्यों दे रहीं चेतावनी ?
पटना। लालू परिवार का पता बदल रहा है। राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड़ स्थित आवास को खाली करने का फिर से नोटिस भेजा गया है। 10 सर्कुलर रोड़ का आवास मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। वैसे तो समय के साथ सब बदलता है, ये सभी जानते हैं, लेकिन सभी के लिए बदलाव सहज हो ये जरूरी नहीं। खास तौर पर जब किसी चीज की समय के साथ आदत पड़ जाए तो उसका बदलना पीड़ा दायक भी हो सकता है। इसके साथ अगर बदलने वाली चीज पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, सरकार-साख, सियासी कद और सियासत के केन्द्र में होने का अहसास दिलाता रहा हो तो बदलाव जले पर नमक जैसा आभाष देता है। बदलाव के लिए दबाव बनाया जाए तो वो बदलाव, बदला जैसा लगने लगता है!

जब प्रभावित व्यक्ति एक साधारण सी सरकारी प्रक्रिया में भी सियासत से प्रेरित प्रतिशोध देखता है तो प्रतिकार का भाव स्वभाविक दिखता है। खास कर सत्ता के केन्द्र में सालों तक बने रहने वाले व्यक्ति को, ये सियासी कद में कटौती, मान हानी का अहसास कराता है। ऐसे में नियम कानून, सरकारी व्यवस्था से कौन चले ? ऐसे में नोटिस को नोटिस कौन करे? फिर वो होता है जो राबड़ी देवी करती नजर आईं। प्रक्रिया के फलस्वरूप कद में कटौती के अहसास के कारण उग्र प्रतिकार, उनका बंगला खाली करने के सवाल पर कहना कि खाली नहीं करेंगे, फोर्स बुला कर खाली करा लो, इसके साथ और काफी कुछ बता जाता है।

अब देखना होगा कि दो दशकों तक जिन चार दिवारियों में राबड़ी ने अपने ‘सरकार’ के सियासी सफर को बनते-संवरते-बिगड़ते देखा, अपने बच्चों को बढ़ते देखा, अप्रत्याशित सपनो सा अपना अपने बच्चों का घर संसार बसते संवरते देखा, जिन चार दिवारियों में दो दशक में यादों के खजाने भरे, ये भूल कर की ये सरकारी बंगला है, छोड़ कर जाना होगा। उसे अपना घर मान लिया। भावावेश में भले सच्चाई से मुंह मोड़ लिया पर सरकारी बंगला तो खाली करना ही पड़ेगा। ये तेवर, तल्खी और लड़ने भिड़ने को तैयार होना क्या जायज है? बंगला सरकार का फिर मुद्दा क्यों तकरार का ?
पटना से दीपक शर्मा की रिपोर्ट