रांची में PESA कानून पर कार्यशाला : पारंपरिक ग्राम सभाओं को अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता-दीपिका पाण्डेय सिंह
रांची:झारखंड में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) यानी PESA कानून लागू होने के बाद उसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गुरुवार को धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के एनेक्सी सभागार में राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई. पंचायती राज विभाग की ओर सेकार्यशाला का आयोजन किया गया.जिसमें विभिन्न जिलों के उप विकास आयुक्त, बीडीओ, सीओ समेत कई पदाधिकारी शामिल हुए.
25 साल के इंतजार बाद लागू हुआ PESA कानून-दीपिका पाण्डेय सिंह
ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राजमंत्री दीपिका पाण्डेय सिंहने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में 25 साल के लंबे इंतजार के बाद PESA कानून लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक ग्राम सभाओं को उनका अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए गांव-गांव तक नियमावली का मजबूत क्रियान्वयन जरूरी है. मंत्री ने कहा किमुख्यमंत्री हेमंत सोरेनके निर्देश पर यह कानून लागू किया गया है, जिनकी सोच रही है कि पारंपरिक ग्राम व्यवस्थाओं को प्राथमिकता मिले. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि PESA क्षेत्र में आने वाले जिलों के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा.
“देश के 10 राज्यों में झारखंड का कानून सबसे बेहतर”
दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि देश के 10 राज्यों में PESA कानून लागू होना था, लेकिन झारखंड की नियमावली सबसे बेहतर और प्रभावी मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर कानून को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि गांव के लोगों की हर समस्या और सवाल का जवाब नियमावली में मौजूद है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत तीन महीने के भीतर ग्राम प्रधानों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए ताकि आगे की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके.
पारंपरिक ग्रामसभा को सशक्त बनाने पर जोर
मंत्री ने कहा कि PESA कानून पारंपरिक ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने वाला कानून है. उन्होंने पारंपरिक ग्राम प्रधान और राजस्व ग्राम प्रधान के बीच अंतर समझने की जरूरत बताई और कहा कि ग्रामसभा के माध्यम से पारंपरिक तरीके से ग्राम प्रधानों का चयन सुनिश्चित किया जाए.
“स्थानीय भाषाओं में कराया गया नियमावली का अनुवाद”-सचिव
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि PESA नियमावली को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों तक इसकी जानकारी प्रभावी तरीके से पहुंचे, इसके लिए नियमावली का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में PESA कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 125 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर जागरूकता फैला रहे हैं.
बाधाओं के अध्ययन के लिए विशेष कमेटी का गठन
सचिव मनोज कुमार ने जानकारी दी कि नियमावली के निर्माण और क्रियान्वयन में कई विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि निदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी बनाई गई है, जो कानून के लागू होने में आने वाली बाधाओं का अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक न्याय व्यवस्था का भी अध्ययन किया जा रहा है ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नियमावली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
तकनीकी सत्र में क्रियान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा
पंचायती राज निदेशालय की निदेशक बी.राजेश्वरी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि राज्य में PESA कानून लागू होना ऐतिहासिक कदम है. उन्होंने कहा कि कानून लागू करने से पहले कई प्रक्रियाएं पूरी की गईं, लेकिन क्रियान्वयन के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आई हैं. कार्यशाला में आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में परंपरागत ग्रामसभा की भूमिका, सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई. साथ ही शिक्षण एवं प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में पारंपरिक स्वशासन को शामिल करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया.
अधिकारियों के बीच खुला संवाद,मिले कई सुझाव
कार्यशाला के दौरान विभिन्न जिलों से आए अधिकारियों के बीच खुला संवाद हुआ. इसमें जमीनी अनुभव साझा किए गए और PESA नियमावली के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए.
रांची से संवाददाता राहुल कुमार की रिपोर्ट