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JHARKHAND NEWS : आयुश्मान आरोग्य मंदिर के ब्रांडिंग एवं अन्य कार्यों के लिए निकाले गये टेंडर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी का जांच का आदेष

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स्वास्थ्य विभाग के एक टेंडर में भारी अनियमितता बरती गई है। सभी नियमों को ताक पर रखकर दो संवेदकों को करोड़ों रूपये का कार्य आवंटित कर दिया गया है। जबकि टेंडर प्रक्रिया में सफल रहे अन्य 12 फर्म को न तो कोई सूचना दी गयी और ना ही कार्य आंवटित किया गया। इस मामले में अब जांच के आदेष दे दिये गये हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन , वित्त सह प्रभारी पदाधिकारी ने जिले के सिविल सर्जन को आदेष जारी किया है कि अगले 7 दिनों के भीतर जांच कर बिंदूवार जांच रिपोर्ट भेजें। आपको बता दें कि इस खबर को कशिश न्यूज ने प्रमुखता से प्रकाषित किया था, जिसके बाद पूरे टेंडर प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन के निदेषक वित्त सह प्रभारी पदाधिकारी ने सिविल सर्जन को लिखे पत्र में कहा है कि झारखंड ई-टेंडर पर पष्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आयुश्मान आरोग्य मंदिर के ब्रांडिंग, कलरिंग, पीट निर्माण एवं अन्य कार्यों के लिए रेट कांटेक्ट का निविदा प्रकाषित की गयी, जिसका टेंडर आईडी 2025-एचएलटीएच-108300-1है। उक्त निविदा के निश्पादन में पारदर्षिता के अभाव, ऑनलाइन पोर्टल पर विलंबित अधतन, निविदा षर्तों के संभावित उल्लंघन, प्राकृतिक न्याय के सिद्वांतो की अवहेलना एवं प्रषासनिक जांच की मांग एआई शिहानं प्रा लि के द्वारा की गयी है। निदेषक ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान लगाये गये सभी आरोपों का बिंदूवार जांच करते हुए सिविल सर्जन को अगले 7 दिनों के भीतर जांच रिर्पोट सौंपने का निर्देष दिया है।

जिस दिन सिविल सर्जन ने पदभार ग्रहण किया, उसी दिन निकाल दिया वर्क ऑर्डर

इस टेंडर घोटाला के संबंध में सिविल सर्जन डा सुझार मांझी ने भी माना है कि प्रथम दृश्टया गड़बड़ी हुई है और वे पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जिस दिन सिविल सर्जन ने योगदान दिया, उसी दिन यानि 26 मार्च को दोनों फर्म को कार्य आवंटित किये जाने के सवाल पर सिविल सर्जन ने कहा है कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। इससे यह संभावना प्रबल हो जा रही है कि सिविल सर्जन को भी अंधेरे में रखकर उनसे हस्ताक्षर ले लिया गया होगा। फिलहाल उन्होंने कहा है कि इस गड़बड़ी के मामले में जो भी दोशी होंगे उन्हें बख्षा नहीं जाएगा। उनके विरूद्व सख्त एवं कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर सिविल सर्जन की माने तो स्वास्थ्य विभाग के एनआरएचएम विभाग के कुछ कर्मियों पर गाज गिरना तय है।

नियमों को ताक पर रखकर किया गया कार्य आवंटन

बता दें कि विगत जनवरी माह में जिले भर के आयुश्मान आरोग्य मंदिरों की ब्रांडिंग और रिपेयरिंग के लिए टेंडर निकाला गया। एक माह बाद फरवरी माह में वित्तीय निविदा खोली गयी और फिर एक माह तक चुपचाप बैठने के बाद चुपके से मार्च माह में पलामू के राहुल इंटरप्राइजेज और चाईबासा के नीरज कुमार के बीच आधा आधा काम बांट दिया गया। मजेदार बात तो यह रही कि इस ऑनलाइन टेंडर की पूरी प्रक्रिया भी नहीं की गयी और ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी भी अपटेड नहीं की गयी। इस टेंडर में भाग लेने वाले अन्य 12 सफल फर्मों को पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया, वहीं उनके द्वारा जमा की गई अग्रिम राषि 12 लाख रूपये भी वापस नहीं किये गये। अब जब मामला काफी गंभीर हो गया है और स्वास्थ्य निदेशक से लेकर उपायुक्त तक से शिकायत की गई है। स्वास्थ्य निदेशक और उपायुक्त द्वारा जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं ,उसके बाद शिकायतकर्ता एवं कुछ अन्य संवेदकों को भी कुछ काम देकर मामले के लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है । ताकि प्रायोजित एवं संनियोजित ढंग से बड़े पैमाने पर हुई टेंडर घोटाला, गड़बड़ी, सरकारी राशि की लूट, घपले ,घोटाले पर पर्दा डाला जा सके। बता दे की प्रारंभ काल से ही स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग का एनआरएचएम यूनिट का कार्य प्रणाली काफी संदिग्ध रहा है, अपने लूट घोटाले, भ्रष्टाचार , कमीशनखोरी , गड़बड़ियों , सरकारी राशि की लूट, अनियमितता बरतने के लिए चर्चित और बदनाम रहा है। पूर्व में रहे अधिकारियों पर लूट , घोटाले, भ्रष्टाचार ,कमीशन खोरी के लिए गाज भी गिरी है और सीआईडी जांच का भी मामला चल रहा है। करोड़ों के आरोग्य भवन के टेंडर मे सरकारी राशि की प्रायोजित ढंग से लूट घोटाले के बाद करोड़ों की टेबल, कुर्सी, मशीन और सामग्री खरीद में भी बड़ा घोटाला और अनियमितता बरती गई है ,मामले को पूरी जांच हुई तो बड़ा घोटाला सामने आएगा।

"कशिश न्यूज" में खबर प्रकाशित होने के बाद मामला हुआ उजागर

आपको बता दें कि इस खबर को "कशिश न्यूज" ने प्रमुखता से उजागर किया, जिसके बाद जिले के सिविल सर्जन डा जुझार मांझी ने इसे गंभीरता से लिया है। और तत्काल आवंटित कार्य पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा है कि उनके स्तर से जांच की जा रही है। दोशियों के विरूद्व कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सूत्रों की माने तो जिन संवेदकों को कार्य आवंटित किया गया है, उनके द्वारा कार्य अब भी किया जा रहा है। कई जगहों पर कार्य भी पूरे कर लिये गये हैं।