JHARKHAND NEWS : JPSC घोटाला: अनियमितताओं के साथ सूचना छिपाने का दोहरा अपराध
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल कोई नए नहीं हैं। हाल ही में CID की छापेमारी में जो बड़े खुलासे सामने आए हैं, उनका सच CBI दो साल पहले ही अपनी चार्जशीट में अदालत के सामने रख चुकी थी। लगभग 12 सालों की लंबी जांच के बाद CBI ने JPSC की गड़बड़ियों का पूरा कच्चा चिट्ठा तैयार किया था।CBI की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, JPSC में न केवल भारी अनियमितताएं हुईं, बल्कि आयोग के अधिकारियों ने जांच में सहयोग तक नहीं किया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पूर्व अध्यक्ष, सदस्यों, पूर्व मुख्यमंत्रियों के सहयोगियों और कई नेताओं के करीबियों व रिश्तेदारों की नियुक्तियां बेहद संदेहास्पद तरीके से की गईं।जांच में मुख्य रूप से ये 4 बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं:
पहली – OMR स्कैनिंग में खेल: स्कैनिंग बिना मेमोरी वाली मशीन से की गई, जिसे बाहरी कंप्यूटर से आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता था। पूरी प्रक्रिया एक निजी कंप्यूटर से हुई, जिसे बाद में गायब कर दिया गया।
दूसरी – बैकडेटेड लेटर से एजेंसी का चयन: परीक्षा कराने वाली एजेंसियों का चयन नियमों को दरकिनार कर किया गया। फाइल में फर्जी और बैकडेटेड पत्र लगाकर काम सौंपा गया।
तीसरी – गर्मी की छुट्टियों में गुप्त मूल्यांकन: मुख्य परीक्षा की कॉपियों को वाराणसी भेजा गया और बिना अनुमति, गर्मी की छुट्टियों के दौरान यूनिवर्सिटी परिसर में कॉपियां जांचवाई गईं।
चौथी – इंटरव्यू में मनमाने नंबर: इंटरव्यू बोर्ड के गठन में 2002 के नियमों का उल्लंघन हुआ। एक ही अभ्यर्थी को अलग-अलग सदस्यों द्वारा दिए गए अंकों में 10 से लेकर 180 नंबरों तक का अंतर पाया गया।वर्ष 2006 से 2008 के बीच रिकॉर्ड में हेराफेरी करके अपात्र उम्मीदवारों को डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों पर चयनित किया गया। CBI ने चार दर्जन से अधिक आरोपियों पर केस चलाने की सिफारिश की थी।
विजिलेंस से लेकर CBI और अब CID की रेड तक—ऐसा लगता है कि दो दशकों से गड़बड़ी का यह पैटर्न जस का तस बना हुआ है, जबकि CBI की चार्जशीट सौंपे जाने के दो साल बाद भी ट्रायल शुरू होने का इंतजार है।